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Ford: ट्रंप युग के टैरिफ बदलाव से फोर्ड को 90 करोड़ डॉलर का झटका, बदली इलेक्ट्रिक वाहन रणनीति
Wed, 11 Feb 2026 08:12 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 11 Feb 2026 08:12 PM IST
सार
कार बनाने वाली कंपनी फोर्ड का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के टैरिफ रिलीफ प्रोग्राम में आखिरी समय में किए गए बदलाव की वजह से उसे पिछले साल की उम्मीद से 900 मिलियन डॉलर ज्यादा टैरिफ देना पड़ा।
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिकी वाहन निर्माता Ford (फोर्ड) ने मंगलवार (स्थानीय समयानुसार) को कहा कि उसे पिछले वर्ष अपेक्षा से लगभग 90 करोड़ डॉलर अधिक टैरिफ चुकाने पड़े। कंपनी के अनुसार, राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा टैरिफ राहत कार्यक्रम में अंतिम समय पर किए गए बदलाव के कारण यह अतिरिक्त बोझ पड़ा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्यक्रम उन वाहन कंपनियों को राहत देने के लिए बनाया गया था जो कार पार्ट्स आयात करती हैं लेकिन असेंबली अमेरिका में करती हैं। उन्हें टैरिफ लागत कम करने के लिए क्रेडिट मिलना था। हालांकि, नियम में देरी से लागू किए गए बदलाव ने फोर्ड की लागत और बढ़ा दी।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्यक्रम उन वाहन कंपनियों को राहत देने के लिए बनाया गया था जो कार पार्ट्स आयात करती हैं लेकिन असेंबली अमेरिका में करती हैं। उन्हें टैरिफ लागत कम करने के लिए क्रेडिट मिलना था। हालांकि, नियम में देरी से लागू किए गए बदलाव ने फोर्ड की लागत और बढ़ा दी।
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टैरिफ राहत कार्यक्रम में क्या बदलाव हुआ?
दिसंबर 2025 में प्रशासन ने फोर्ड को सूचित किया कि राहत नीति पहले तय समय से बाद में लागू होगी। इस देरी के कारण कंपनी को अपेक्षा से कम क्रेडिट मिले।
फोर्ड के सीईओ जिम फार्ले ने कहा कि 2025 में कंपनी ने करीब 2 अरब डॉलर टैरिफ के रूप में चुकाए, जो अनुमानित राशि से लगभग दोगुना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम समय के बदलाव ने कंपनी की लागत बढ़ा दी।
यह घटनाक्रम बताता है कि ऑटो उद्योग अभी भी आयात कर और सरकारी नीतियों में अनिश्चितता से जूझ रहा है।
दिसंबर 2025 में प्रशासन ने फोर्ड को सूचित किया कि राहत नीति पहले तय समय से बाद में लागू होगी। इस देरी के कारण कंपनी को अपेक्षा से कम क्रेडिट मिले।
फोर्ड के सीईओ जिम फार्ले ने कहा कि 2025 में कंपनी ने करीब 2 अरब डॉलर टैरिफ के रूप में चुकाए, जो अनुमानित राशि से लगभग दोगुना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम समय के बदलाव ने कंपनी की लागत बढ़ा दी।
यह घटनाक्रम बताता है कि ऑटो उद्योग अभी भी आयात कर और सरकारी नीतियों में अनिश्चितता से जूझ रहा है।
Ford CEO Jim Farley
- फोटो : Linkedin/Jim Farley
क्या Ford ने EV रणनीति भी बदली?
टैरिफ के अलावा, फोर्ड ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) रणनीति में भी बदलाव किया है। कंपनी ने पहले ही घोषणा की थी कि वह बड़े इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन से पीछे हट रही है।
इस निर्णय के चलते कंपनी को 19.5 अरब डॉलर का झटका लगा। जिसने चौथी तिमाही में 11.1 अरब डॉलर के शुद्ध घाटे में अहम भूमिका निभाई।
कंपनी का कहना है कि बड़े ईवी मॉडलों की मांग कमजोर रही और बदलती नीतियों के कारण इस दिशा में निवेश का व्यावसायिक आधार कमजोर पड़ गया। अब Ford लाभदायक हाइब्रिड, पेट्रोल और छोटे किफायती ईवी मॉडलों पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रही है।
इससे पहले General Motors (जनरल मोटर्स) ने भी अक्तूबर 2025 में अपनी ईवी योजनाओं को कम करने की घोषणा की थी। और 1.6 अरब डॉलर के संभावित नुकसान की बात कही थी।
टैरिफ के अलावा, फोर्ड ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) रणनीति में भी बदलाव किया है। कंपनी ने पहले ही घोषणा की थी कि वह बड़े इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन से पीछे हट रही है।
इस निर्णय के चलते कंपनी को 19.5 अरब डॉलर का झटका लगा। जिसने चौथी तिमाही में 11.1 अरब डॉलर के शुद्ध घाटे में अहम भूमिका निभाई।
कंपनी का कहना है कि बड़े ईवी मॉडलों की मांग कमजोर रही और बदलती नीतियों के कारण इस दिशा में निवेश का व्यावसायिक आधार कमजोर पड़ गया। अब Ford लाभदायक हाइब्रिड, पेट्रोल और छोटे किफायती ईवी मॉडलों पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रही है।
इससे पहले General Motors (जनरल मोटर्स) ने भी अक्तूबर 2025 में अपनी ईवी योजनाओं को कम करने की घोषणा की थी। और 1.6 अरब डॉलर के संभावित नुकसान की बात कही थी।
तिमाही नतीजों पर क्या असर पड़ा?
एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फोर्ड ने पिछले चार वर्षों में सबसे बड़ा तिमाही आय लक्ष्य चूका। कंपनी की चौथी तिमाही की कमाई (EBIT) अनुमानित 7.7 अरब डॉलर से घटकर 6.8 अरब डॉलर रह गई।
फोर्ड की मुख्य वित्तीय अधिकारी शेरी हाउस ने बताया कि न्यूयॉर्क स्थित नोवेलिस एल्युमिनियम प्लांट में लगी आग ने भी उत्पादन और मुनाफे पर असर डाला। यह प्लांट फोर्ड की लाभदायक F-सीरीज पिकअप ट्रकों के लिए एल्युमिनियम सप्लाई करता है और इसके मध्य वर्ष तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है।
एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फोर्ड ने पिछले चार वर्षों में सबसे बड़ा तिमाही आय लक्ष्य चूका। कंपनी की चौथी तिमाही की कमाई (EBIT) अनुमानित 7.7 अरब डॉलर से घटकर 6.8 अरब डॉलर रह गई।
फोर्ड की मुख्य वित्तीय अधिकारी शेरी हाउस ने बताया कि न्यूयॉर्क स्थित नोवेलिस एल्युमिनियम प्लांट में लगी आग ने भी उत्पादन और मुनाफे पर असर डाला। यह प्लांट फोर्ड की लाभदायक F-सीरीज पिकअप ट्रकों के लिए एल्युमिनियम सप्लाई करता है और इसके मध्य वर्ष तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है।
Ford Bronco New Energy EV
- फोटो : Ford China
क्या Ford को वैश्विक बिक्री में भी झटका लगा?
रिपोर्ट के अनुसार, चीनी वाहन निर्माता BYD (बीवाईडी) ने पहली बार वैश्विक बिक्री में फोर्ड को पीछे छोड़ दिया।
फोर्ड की वैश्विक वाहन शिपमेंट पिछले वर्ष लगभग 2 प्रतिशत गिरकर 44 लाख से कम रह गई, जबकि बीवाईडी की बिक्री 46 लाख रही। इसके साथ ही बीवाईडी दुनिया की छठी सबसे बड़ी ऑटो कंपनी बन गई।
हालांकि अमेरिका में फोर्ड की बिक्री बढ़ी, लेकिन यूरोप और खासकर चीन में कंपनी ने बाजार हिस्सेदारी खो दी। चीन में स्थानीय ब्रांड जैसे BYD, Xiaomi (शाओमी) और Geely (गीली) किफायती और तकनीक-आधारित ईवी पेश कर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। जिससे विदेशी कंपनियों पर दबाव बढ़ा है।
आगे क्या संकेत मिलते हैं?
फोर्ड का मानना है कि 2026 कंपनी के लिए रिकवरी का वर्ष हो सकता है। हालांकि, टैरिफ नीतियों, ईवी मांग में गिरावट और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनी को अपनी रणनीति सावधानी से आगे बढ़ानी होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, चीनी वाहन निर्माता BYD (बीवाईडी) ने पहली बार वैश्विक बिक्री में फोर्ड को पीछे छोड़ दिया।
फोर्ड की वैश्विक वाहन शिपमेंट पिछले वर्ष लगभग 2 प्रतिशत गिरकर 44 लाख से कम रह गई, जबकि बीवाईडी की बिक्री 46 लाख रही। इसके साथ ही बीवाईडी दुनिया की छठी सबसे बड़ी ऑटो कंपनी बन गई।
हालांकि अमेरिका में फोर्ड की बिक्री बढ़ी, लेकिन यूरोप और खासकर चीन में कंपनी ने बाजार हिस्सेदारी खो दी। चीन में स्थानीय ब्रांड जैसे BYD, Xiaomi (शाओमी) और Geely (गीली) किफायती और तकनीक-आधारित ईवी पेश कर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। जिससे विदेशी कंपनियों पर दबाव बढ़ा है।
आगे क्या संकेत मिलते हैं?
फोर्ड का मानना है कि 2026 कंपनी के लिए रिकवरी का वर्ष हो सकता है। हालांकि, टैरिफ नीतियों, ईवी मांग में गिरावट और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनी को अपनी रणनीति सावधानी से आगे बढ़ानी होगी।