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अमेरिकी बेस पर बीवाईडी के वाहनों पर लगी रोक: क्या चीनी कंपनी की गाड़ियों से सच में है खतरा? जानें पूरा मामला

Tue, 27 Oct 2026 03:04 PM IST
कुलदीप शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुलदीप शर्मा Updated Tue, 27 Oct 2026 03:04 PM IST
सार

  • जापान के कडेना एयरबेस पर BYD की हर गाड़ी के आने पर 26 अक्टूबर से रोक है। 
  • सेना ने कोई खास कमजोरी नहीं बताई है। आशंका है कि कैमरे और सेंसर सैन्य ठिकाने की जानकारी बाहर भेज सकते हैं।
  • जोखिम हर कनेक्टेड वाहन में है, सिर्फ चीनी कारों में नहीं। 

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Are BYD Cars a Security Threat What the US Military Ban at Kadena Air Base Really Means
प्रतीकात्म इमेज - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

अमेरिका ने अपने जापान स्थित कडेना एयरबेस पर BYD की गाड़ियों पर रोक लगा दी है। इसके बाद चीनी कंपनी की कार को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या ये कारें सच में कॉन्फीडेंशियल डेटा के लिए खतरा हैं, या यह डर ज्यादा है और सबूत कम हैं? इसका जबाव हां या न में नहीं बल्कि थोड़ा बीच का है। चिंताएं असली हैं, पर किसी जासूसी का सबूत अभी सामने नहीं आया है। आइए जानते हैं कि चीनी कंपनी बीवाईडी की गाड़ियों को अमेरिका ने क्या कहकर बेन किया है।

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अमेरिका ने क्यों लिया ये फैसला?

अमेरिका ने कडेना बेस पर BYD की गाड़ियों के आने पर 26 अक्टूबर से रोक लगा दी है और यह फैसला बेस की हर तरह की गाड़ी पर लागू है। बेस चलाने वाली वायुसेना की यूनिट ने कहा कि ये गाड़ियां उसके लोगों और मिशन के लिए ऐसा जोखिम हैं जिसे कम नहीं किया जा सकता। हालांकि इस मामले में कमान ने कोई स्पेशिफिक कमजोरी पब्लिक नहीं की है। और सवाल उठने का यही सबसे बड़ा कारण भी है।

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आखिर डर है किस बात का?

दरअसल आज की कार सिर्फ इंजन और पहिए नहीं रही। उसमें कैमरे, सेंसर, जीपीएस, माइक्रोफोन और इंटरनेट कनेक्शन होते हैं। अमेरिकी चिंता यह बताई जा रही है कि कैमरे और सेंसर सैन्य ठिकानों की तस्वीरें और जानकारी इकट्ठा करके कहीं भेज सकते हैं। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि अब तक ऐसा कोई भी ऐसा पब्लिकली सबूत मौजूद नहीं  है कि इस कंपनी की गाड़ियों ने बेस से ऐसी जानकारी सच में भेजी हो। मतलब सीधा है कि यह संभावित खतरा भर है।

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ऑस्ट्रेलिया की जांच में क्या दिखा

सबसे पक्का उदाहरण ऑस्ट्रेलिया से आया है। दरअसल कैनबरा की एक सिक्योरिटी फर्म चलाने वाले रिसर्चर ने BYD Shark 6 की सॉफ्टवेयर कमजोरियां दिखाई थी। इसमें ब्रेक और कैमरे ज्यादा सिक्योर निकले लेकिन टेस्ट ने दिखाया कि कनेक्टेड गाड़ी तक पहुंच बनाई जा सके तो क्या हो सकता है।  वहीं एक पड़ताल के मुताबिक BYD की निजता क नीति में कथित गैरकानूनी गतिविधियों के सिलसिले में निगरानी के जरिए डेटा जुटाने की बात सामने आी थी, जिसे कंपनी ने बाद में हटा दिया था। हालांकि कंपनी इससे इनकार करती है कि बदलाव जांच के जवाब में किया गया है। 

कंपनी ने क्या पक्ष रखा है?

इस पूरे मामले पर BYD ने कहा है कि उसने ऑस्ट्रेलियाई लोगों का डेटा चीनी अधिकारियों को न दिया है, न देगा। पर विशेषज्ञ एक पेच की तरफ इशारा करते हैं। चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों के तहत कंपनियों को जरूरत पड़ने पर अधिकारियों के साथ सहयोग करना होता है। इसलिए बहस सिर्फ कंपनी के वादे तक ही सीमित नहीं है बल्कि उस लीगल स्ट्रक्चर की भी है जिसमें कंपनी काम करती है। 

क्या सिर्फ चीनी कारें हैं खतरा?

दरअसल ऐसा नहीं है. इसमें रिसर्च करने वाले रिसर्चर ने बताया है कि खतरा हर उस व्हीकल में है जिसमें सेल्युलर मॉडम वाला टेलीमैटिक्स बॉक्स लगा होता है। यानी बस, कृषि कार्य करने वाली मशीनों और खदानों की मशीनों तक से ये खतरा है। ऑस्ट्रेलिया में कारों के लिए साइबर-सुरक्षा के मिनिमम पैराममीटर ही नहीं थे। इसी कारण से हैकिंग आसान हुई। 
 

तो क्या है पूरा लब्बोलुआब?

सबूत: जासूसी या डेटा चोरी का कोई सार्वजनिक सबूत नहीं है।
जोखिम: तकनीकी रूप से कनेक्टेड कारों में डेटा और हैकिंग की चिंता असली है।
सबसे बड़ा सवाल: डेटा कहां रखा जाता है, किसे जाता है, और किस देश के कानून के तहत नहीं पता।

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