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Delhi Blast: दिल्ली विस्फोट मामले में ह्यूंदै i20 मालिक ने की ये बड़ी भूल, कार बेचते वक्त आप न करें ये गलतियां

Tue, 11 Nov 2025 08:13 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 11 Nov 2025 08:13 PM IST
सार

दिल्ली के लाल किला के पास सोमवार शाम हुए धमाके की गूंज से दिल्ली सहम गई। जांच में पता चला कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई ह्यूंदै i20 कई बार अलग-अलग राज्यों में बेची गई, लेकिन कभी भी उसका रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर नहीं हुआ।

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Delhi Blast Case Vehicle Ownership Blunder Exposes Big Legal Risk for Car Sellers what to do with registration
धमाके से पहले का वीडियो फुटेज - फोटो : वीडियो ग्रैब

विस्तार

दिल्ली के लाल किला के पास सोमवार शाम हुए धमाके की गूंज से दिल्ली सहम गई। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि इसे ढाई किलोमीटर दूर तक सुना गया। इस भयंकर विस्फोट ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस विस्फोट में 12 लोगों की जान चली गई और 20 से ज्यादा लोग घायल हैं। जांच में पता चला कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई ह्यूंदै i20 कई बार अलग-अलग राज्यों में बेची गई, लेकिन कभी भी उसका रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर नहीं हुआ।
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यह लापरवाही अब जांच का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। और यही वह गलती है जो कई कार मालिक बेचते वक्त कर देते हैं, जिससे वे अनजाने में कानूनी मुसीबत में फंस जाते हैं।
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बिना ट्रांसफर के बार-बार बिकती रही कार
यह i20 (रजिस्ट्रेशन नंबर: HR26CE7674) 2013 में बनी थी। 2014 में इसका दूसरा मालिक बना सलमान, जो गुरुग्राम का रहने वाला है। इसके बाद कार दिल्ली के ओखला निवासी देवेंद्र को बेची गई, फिर अंबाला के एक व्यक्ति को, और फिर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आमिर के नाम पहुंच गई।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। आखिरकार यह कार डॉ. उमर मोहम्मद के पास पहुंची, जिसे अब आत्मघाती हमलावर माना जा रहा है। इन तमाम खरीद-फरोख्त के बावजूद, किसी ने भी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर नहीं करवाया। नतीजा यह हुआ कि आज जब जांच शुरू हुई, तो कानूनी जिम्मेदारी पहले मालिक सलमान पर आ गई। क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में वही असली मालिक है।

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भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से ही करें गाड़ी की बिक्री
जांच में सामने आया कि यह कार ब्लास्ट से सिर्फ 4 दिन पहले फरीदाबाद में एक डीलर 'रॉयल कार जोन' के सोनू नामक व्यक्ति ने बेची थी। डीलर ने नई ओनरशिप ट्रांसफर करवाने की प्रक्रिया को टाल दिया, ताकि खर्चा बचाया जा सके। पर इस लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि आखिरी खरीदार तो फरार है, और पिछला मालिक अब संदिग्धों की लिस्ट में है।

इसलिए सलाह दी जाती है कि हमेशा किसी भरोसेमंद कार बिक्री प्लेटफॉर्म के जरिए ही अपनी कार बेचें, जहां ओनरशिप ट्रांसफर की गारंटी और कानूनी जांच सुनिश्चित होती है।

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गाड़ी बेचने से पहले दस्तावेज करें तैयार
कार बेचने से पहले सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखना बेहद जरूरी है। जैसे कि RC बुक, इंश्योरेंस सर्टिफिकेट, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, सर्विस हिस्ट्री और टैक्स रिसीट्स। अगर आपके पास ये सब कागजात तैयार हैं, तो ट्रांसफर प्रक्रिया आसानी से पूरी हो जाती है। दूसरी ओर, अगर आप कोई सेकंड-हैंड कार खरीद रहे हैं, तो पहले उसकी ओनरशिप हिस्ट्री जरूर जांचें, ताकि बाद में कोई कानूनी समस्या न हो।

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इंश्योरेंस और RTO ट्रांसफर करना न भूलें
गाड़ी बेचते वक्त सिर्फ आरसी ट्रांसफर ही नहीं, बल्कि इंश्योरेंस ट्रांसफर भी बेहद जरूरी है। अगर इंश्योरेंस नए मालिक के नाम पर ट्रांसफर नहीं किया गया, तो किसी भी हादसे की जिम्मेदारी पुराने मालिक पर आ सकती है। साथ ही, बिक्री से पहले कोई लंबित चालान, लोन या टैक्स बकाया हो तो उसे चुका दें, ताकि ओनरशिप ट्रांसफर में देरी न हो।

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आरटीओ में जरूरी फॉर्म भरें
गाड़ी का ट्रांसफर पूरा करने के लिए फॉर्म 28, 29 और 30 भरकर आरटीओ दफ्तर में जमा करें।
  • फॉर्म 28: NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) के लिए
  • फॉर्म 29 और 30: ओनरशिप ट्रांसफर के लिए
इनकी रसीद और कॉपी अपने पास रखें, क्योंकि भविष्य में किसी कानूनी विवाद के समय यही आपके सबूत बनेंगे।

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एक छोटी लापरवाही, बड़ी मुसीबत
दिल्ली ब्लास्ट केस ने साफ कर दिया है कि पुरानी गाड़ी बेचते वक्त लापरवाही भारी पड़ सकती है। किसी हादसे, अपराध या विवाद में अगर गाड़ी शामिल पाई गई और रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर नहीं हुआ, तो कानूनी रूप से जिम्मेदार पुराना मालिक ही होगा। इसलिए अगली बार जब आप अपनी कार बेचें, तो सुनिश्चित करें कि ओनरशिप ट्रांसफर कानूनी तरीके से पूरा हो, ताकि आपकी सुरक्षा बनी रहे। 

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