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रण ऑफ कच्छ टू दिल्ली : एक कॉम्पैक्ट सेडान और 2500 किलोमीटर की ड्राइव

Fri, 03 Feb 2017 05:35 PM IST
अमित द्विवेदी/अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित द्विवेदी/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 03 Feb 2017 05:35 PM IST
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one compact sedan driven more than 2500 kilometer
यात्राओं के कई प्रकार होते हैं लेकिन मेरी सभी यात्राएं सड़कों से होकर किसी मंजिल तक इसलिए पहुंचती हैं कयोंकि उसमें शामिल होती है एक कार। कार ड्राइविंग के साथ जब आप कहीं आगे बढ़ते हो तो आप सीधे-सीधे न सिर्फ उस संस्‍कृति के करीब खुद को पाते हो बल्कि उसकी नस-नस तक पहुंचने का साधन आपके पास होता है। जब आप किसी पर निर्भर रहते हो तो वही देखते हो जो वह दिखाता है लेकिन जब आप आजाद होते हो तो वह सब देख पाते हो जो आप देखना चाहते हो।
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इस बार जब मैंने गुजरात से लेकर दिल्‍ली तक का रोड ट्रिप प्‍लान किया तो मेरे टारगेट पर था रण ऑफ कच्‍छ। पिछली बार जब तवांग की ड्राइव की थी उस समय मैंने एक एसयूवी को चुना लेकिन इस बार मेरा टारगेट एकदम स्‍पष्‍ट था क्‍योंकि अच्‍छी सड़कों पर मैं वह कार चलाना चाहता था जो लोगों के सपनों को आसानी से पूरा कर सके। फोर्ड फिगो एस्‍पायर एक ऐसी ही कार है। जिसकी पूरी छवि आप सिर्फ उसे बाहर से निहारकर नहीं देख सकते। उसके लिए जरूरी है आप कार में अंदर बैठें और उसकी ड्राइविंग योग्‍यता के साथ कदमताल करें। तो आइए आपकी अपेक्षाओं की कसौटी पर कसकर इस कार की ड्राइविंग योग्‍यता पर एक नजर डालते हैं, साथ ही आपको करवाते हैं रण ऑफ कच्‍छ से दिल्‍ली की सड़क यात्रा।
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फोर्ड फिगो एस्‍पायर एक परिचय

one compact sedan driven more than 2500 kilometer
रण ऑफ कच्‍छ टू दिल्‍ली
इसके पहले आपको इस यात्रा पर ले चलें सबसे पहले आपको मिलवा देते हैं उस सूत्रधार से जिसकी बदौलत हमने इतनी लंबी दूरी तय की। मैं यहां पर बात कर रहा हूं फोर्ड फिगो एस्‍पयार की, जिसे अहमदाबाद से जामनगर से रन ऑफ कच्‍छ और फिर जामनगर से जोधपुर के रास्‍ते अजमेर जयपुर होते हुए दिल्‍ली पहुंचे। फिगो एस्‍पायर फोर्ड की एंट्री लेवल सेडान कार है जो पूरी तरह कंपनी की सफलतम हैचबैक फिगो पर आधारित है।
 
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अहमदाबाद से जामनगर

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अहमदाबाद से जामनगर की दूरी 306 किलोमीटर की है। नेशनल हाईवे 47 से होते हुए लगभग पांच घंटे का वक्‍त लगता है। राजकोट से होते हुए आप जामनगर पहुंचते हैं। यह पूरा हाईवे अहमदाबाद से 40 किलोमीटर बाद लगभग खाली रहता है। गुजरात के साफ-सुथरे हाईवे में यहां के विकास की छवि नजर आती है। खासकर के फोर्ड फिगो एस्‍पायर को ऐसे रास्‍ते ज्‍यादा अच्‍छे लगते हैं। अधिक गति पर चलना उसे बहुत अच्‍छा लगता है खासकर के जब आप 1.2 लीटर पेट्रोल वेरिएंट चला रहे हों जो कि 87 बीएचपी की शक्ति 112 एनएम का टॉर्क प्रदान करती है।

जामनगर घूमने के बाद अब बारी गुजरात के उस जगह जाने की थी जो आजकल पूरी दुनिया में रन ऑफ कच्‍छ के नाम से जाना जाता है। जामनगर के आसपास ढेर सारी ऐतिहासिक गाथाओं में गुथी ऐसी कहानियां जिसे देखकर और उसके बारे में जानकर बहुत अच्‍छा लगता है। कभी जामनगर आना हो तो यहां पर लखोटा पैलेस जरूर देखें और यहां के शाम का लेजर शो जरूर देखें आपको बहुत मजा आएगा। हालांकि प्रताप विलास पैलेस अब एक होटल बन चुका है तो यहां आकर आप थोड़ा निराश हो सकते हैं।
 
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जामनगर से भुज

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भुज का सबसे पहले नाम मैंने तब सुना था जब यहां पर 26 जनवरी 2001 को विनाशकारी भूकंप आया था। लेकिन बहुत तेजी के साथ इस शहर ने अपने जख्‍म को भर लिया और तरक्‍की की एक ऐसी इबादत तैयार की जिसका उदाहरण पूरी दुनिया देने लगी है। जामनगर से सीधे इस श्‍हर को गुजरात स्‍टेट हाईवे 6 जोड़ता है और इसकी दूरी यहां से 258 किलोमीटर की है। यह हाईवे लगभग 80 किलोमीटर तक सिंगल है। ऐसे हाईवे को मैं गाड़ियों की दक्षता परखने के लिए सबसे ज्‍यादा उपयुक्‍त मानता हूं।

अपने खूबसूरत और व्‍यावहारिक इंटीरियर से दिल में रच बस रही एस्‍पायर को ओवरटेकिंग करने में बहुत मजा आ रहा था। इस हाईवे पर ज्‍यादातर ट्रक नजर आते हैं। इसलिए आपको ओवरटेकिंग करना एक टास्‍क जैसा हो जाता है। बहुत ही कम गाड़ियां इस रास्‍ते पर ऐसी दिखीं जिन्‍होंने मुझे ओवरटेक करने का प्रयास किया हो। अगर हर कदम पर बदलते मिजाज को देखना है तो कार यात्रा सबसे बढ़िया टूल है। जीरा और कपास की खेती गुजरात के तटीय इलाकों में होती है। यहां पर इस मौसम में आपको लहलहाती सरसों की फसलों की जगह दूर-दूर तक कपास की सफेदी या फिर जीरे की फसल नजर आएगी।
 

भुज से रण ऑफ कच्‍छ

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भुज से रण ऑफ कच्‍छ यानी कि धोरड़ो की दूरी 80 किलोमीटर की है। यहीं पर हर साल नवंबर से फरवरी तक रण उत्‍सव का आयोजन किया जाता है। रण ऑफ कच्‍छ बहुत बड़ा है लेकिन अब यह जगह लोगों में बहुत लोकप्रिय है। लोग यहां पर आते हैं, टेंट में रहते हैं, उंट की सवारी के साथ-साथ कई तरह के एडवेंचर करते हैं। एनएच 341 इस जगह को भुज से जोड़ता है।

जब आप इस हाईवे पर गाड़ी चलाएंगे तो स्‍पीड की कोई सीमा नहीं रह जाती क्‍योंकि यह रास्‍ता बहुत ही अच्‍छा है लेकिन यहां पर कभी भी कोई जानवर रास्‍ता पार करने लगता है इसलिए सावधानी बेहद जरूरी होती है। हालांकि एस्‍पयार के 100 से 0 ब्रेकिंग टेस्‍ट करने का सबसे अच्‍छा मौका यहां पर कई बार मिला और बहुत ही स्थिरता के साथ हम बिना कोई एक्‍सीडेंट किए रुक गए। दूर- दूर तक कुछ नजर नहीं आता लेकिन नर्मदा नहर के पानी से अब यहां के लोगों की जिंदगी गुलजार है। इस उत्‍सव के जरिए गांव वाले अच्‍छी आमदनी बना लेते हैं।
 

कच्‍छ से जोधपुर

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जोधपुर को लोग यहां के महल और राजसी अंदाज के लिए जानते हैं लेकिन मेरे लिए जोधपुर बेहद अहम इसलिए है क्‍योंकि यहां पर एशिया का सबसे बड़ा एयरबेस है। जी जान से जुटे हमारे एयर सैन्‍य अधिकारी हर पल यह सुनिश्चित करते रहते हैं कि हमारा देश कैसे और मजबूत बने जिससे हर कोई सुरक्षित महसूस कर सके। फाइटर प्‍लेन्‍स की आवाज से कांपती यह धरती इस बात का प्रमाण देती है कि यूं जिंदगी में जय हिंद मायने नहीं रखता। मुझे यह एयरबेस करीब से देखने का मौका मिला।

कच्‍छ से यहां की दूरी 728 किलोमीटर की है। दो नेशनल हाईवे मिलकर आपको यहां तक पहुंचाने में मदद करते हैं। भुज तक नेशनल हाईवे 341 को छोड़ने के बाद एनएच 27 और एनएच 62 से होते हुए आप जोधपुर पहुंचते हैं। यहां पर फाइटर प्‍लेन और फोर्ड फिगो एस्‍पयार में एक समानता है वो यह है रनवे से उड़ान भरते समय फाइटर की आवाज बहुत तेज होती है और ऐसी गुर्राहट एस्‍पयार के एग्‍जॉस्‍ट से सुनाई देती है जब आप इसके 1.2 लीटर पेट्रोल इंजिन से ऐसा ही कुछ समर्थन मिलता है। उच्‍च गति पर इसकी स्थिरता काबिले तारीफ है। आप चाहे यहां के हाईवे की तारीफ करें या फिर एस्‍पायर की, 728 किलोमीटर की दूरी पालनपुर, सिरोही और पाली से गुजरते हुए महज 8 घंटे में पूरी की।
 

जोधपुर से दिल्‍ली

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जोधपुर से दिल्‍ली तक इस यात्रा का अंतिम पड़ाव था और एस्‍पायर की मंजिल थी दिल्‍ली। जोधपुर से दिल्‍ली की दूरी है 603 किलोमीटर। अजमेर और जयपुर ये दो प्रमुख शहर बीच में पड़ते हैं। एनएच 48 और एनएच 62 दो हाईवे मिलकर आपको यहां पहुंचा देते हैं। यह रास्‍ता ऐसा है जहां पर आपको धैर्य की जरूरत होती है। जयपुर तक पहुंचने के बाद दिल्‍ली के रास्‍ता बहुत व्‍यस्‍त रहता है ऐसे में अगर आपकी कार का केबिन अच्‍छा न हो तो मुश्किल आती है और आप जल्‍दी थक जाते हैं।

एस्‍पायर के बाहरी रूप से मैं उतना खुश नहीं होता जितना इसमें बैठकर होता हूं इसके बाद इसका परफॉर्मेंस मुझे प्रभावित करता है। मानेसर के बाद ट्रकों की कतारों ने ड्राइव मानो रोककर रख दी हो। इसके बावजूद 9 घंटे में मैं दिल्‍ली पहुंचा। इसके बाद इंडिया गेट पर बाहर निकलकर इस गाडी की तरफ देखा तो मुझे एक अलग ताजगी का अहसास हुआ क्‍योंकि पहली बार एक कॉम्‍पैक्‍ट सेडान से मैंने इतनी लंबी ड्राइव करने की हिम्‍मत की थी और इस कार ने मेरा पूरा समर्थन किया।
 
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