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सरकारी राहत पर टिकी ऑटो कंपनियों की उम्मीदें
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jan 2013 11:42 AM IST
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जिस भारतीय बाजार में दुनिया की जानी-मानी कार निर्माता कंपनियों को बड़ी संभावनाएं दिख रही थीं, इस उसके साल हालात काफी हद तक बदल चुके हैं। महंगे ईंधन, महंगे ऑटो लोन और आर्थिक सुस्ती के चलते गत दिसंबर में कारों की बिक्री पिछले साल के मुकाबले करीब 12.5 फीसदी गिरी है। इसे देखते हुए वाहन निर्माताओं के संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सिआम) ने चालू वित्त वर्ष में कारों की बिक्री में वृद्धि के अनुमान को घटाकर शून्य से एक फीसदी के बीच कर दिया है, जो गत नौ वर्षों में सबसे कम है।
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ऑटोमोबाइल क्षेत्र को सुस्ती की मार से उबारने के लिए सिआम ने वाहनों पर उत्पाद शुल्क में कटौती के साथ-साथ ऑटो मिशन प्लान को दस साल बढ़ाने की मांग की है। सिआम के अध्यक्ष एस शांडिल्य का कहना है कि अगर सरकार की ओर से पूरी मदद नहीं मिलती है तो मौजूदा स्थितियों को देखते हुए ऑटोमोबाइल उद्योग के आगामी मार्च तक भी उबरने के आसार नहीं हैं। पिछले बजट में सरकार ने वाहनों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया था, जिसे कम करने की जरूरत है। कॉमर्शियल वाहनों पर उत्पाद शुल्क में कटौती करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
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गौरतलब है कि फिलहाल वाहनों पर छह फीसदी से लेकर 27 फीसदी तक उत्पाद शुल्क लगता है। बुधवार को सिआम की ओर से जारी वाहनों की बिक्री के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक कारों की बिक्री पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0.33 फीसदी कम रही है। गत अगस्त में भी कारों की बिक्री में 18 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी। चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में कारों की बिक्री में 9-11 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान था, जिसे बाद में घटाते हुए 1-3 फीसदी किया गया था।
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कार निर्माता कंपनियों की ओर से दिए जा रहे तमाम ऑफर और छूट के बावजूद कारों की बिक्री सुस्त है। जिसके चलते ऑटोमोबाइल मिशन प्लान (एएमपी) के तहत वर्ष 2016 तक 145 अरब डॉलर के सालाना कारोबार का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है।