NCAP टेस्ट में पांच भारतीय कारें हुई फेल
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भारत में मौजूद कार कंपनियों के लिए जनवरी 2014 में हुआ ग्लोबल NCAP (न्यू कार एस्समेंट प्रोग्राम) क्रैश टेस्ट एक बड़ा झटका था। इस क्रैश टेस्ट में भारत में तैयार पांच छोटी कारों को उतारा गया था। क्रैश टेस्ट में इनकी सेफ्टी रेटिंग जीरो रही थी।
अब तीसरी बार बड़े पैमाने पर यह क्रैश टेस्ट फिर किया गया है। 17 मई को क्रैश टेस्ट के आए नतीजे भी चिंताजनक रहे हैं। एजेंसी द्वारा किए गए परिक्षण में एक बार फिर 5 भारतीय कारें फेल हो गई हैं।
कारों की सुरक्षा का स्तर जांचने के लिए किए जाने वाले क्रैश टेस्ट में मारुति सुजुकी सेलेरियो, मारुति ईको वेन, महिंद्रा स्कॉर्पियो, रेनो क्विड और हुडई इऑन को इस टेस्ट में जीरो रेटिंग मिली है।
बीते दो साल में ग्राहकों में जागरूकता बढ़ने के साथ ही कार कंपनियों ने सेफ्टी के मामले में ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया है। ऐसे में उम्मीद थी कि इस बार भारतीय कारों का प्रदर्शन पहले से कहीं बेहतर रहेगा।
टेस्टिंग प्रोटोकॉल के तहत सभी कारों (बेस वेरिएंट्स सहित) में एयरबैग होना अनिवार्य है, साथ ही प्रोटोकॉल के तहत सभी कारों को एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम सर्टिफिकेट होना चाहिए।
दो साल पहले ये कारें हुई थीं फेल
दो साल पहले हुए ग्लोबल एनकैप क्रैश टेस्ट में टाटा नैनो, मारुति सुजुकी ऑल्टो-800, हुंडई आई-10, फोर्ड फीगो और फॉक्सवेगन पोलो को उतारा गया था। सभी कारें टेस्ट में असफल रहीं।
इसके बाद इसी साल नवंबर में निसान की डैटसन गो और मारुति सुजुकी स्विफ्ट का क्रैश टेस्ट हुआ। इन्हें भी जीरो सेफ्टी रेटिंग हासिल हुई। अब तीसरी बार यह टेस्ट होने जा रहा है।
पहले ग्लोबल क्रैश टेस्ट के बाद तुरंत कदम उठाते हुए फॉक्सवेगन ने पोलो में ड्यूल एयरबैग्स को स्टैंडर्ड कर दिया। फॉक्सवेगन के बाद बाकी कंपनियों ने भी इस दिशा में कदम उठाते हुए एयरबैग्स को स्टैंडर्ड या ऑप्शनल तौर पर देना शुरू किया है।