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Overspeeding: ओवर-स्पीडिंग डिवाइस क्या होती है, क्या इसे भारत में सभी कारों पर अनिवार्य किया जाना चाहिए?
Wed, 12 Jun 2024 02:07 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 12 Jun 2024 02:07 PM IST
सार
सबसे ज्यादा संख्या में सड़क दुर्घटनाओं वाले देशों की सूची में भारत का स्थान सबसे ऊपर है। यहां अत्यधिक रफ्तार को अक्सर दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। लेकिन एक ओवर-स्पीड डिवाइस, सुरक्षित ड्राइविंग प्रथाओं को सुधारने के मकसद से अगला कदम हो सकता है।
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Over Speeding
- फोटो : Freepik
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विस्तार
दुनिया भर की सड़कों पर तेज रफ्तार एक बहुत ही भयानक खतरा है। सबसे ज्यादा संख्या में सड़क दुर्घटनाओं वाले देशों की सूची में भारत का स्थान सबसे ऊपर है। यहां अत्यधिक रफ्तार को अक्सर दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। जबकि देश में बेची जाने वाली लगभग हर कार में अब 80 किमी प्रति घंटे पर विजुअल और ऑडियो वार्निंग बीप और 120 किमी प्रति घंटे से ज्यादा पर लगातार बीप होता है। लेकिन एक ओवर-स्पीड (गति सीमा) डिवाइस सुरक्षित ड्राइविंग प्रथाओं को सुधारने के मकसद से अगला कदम हो सकता है।
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ओवर-स्पीड डिवाइस, जिसे इंटेलिजेंट स्पीड असिस्टेंस सिस्टम या आईएसए (ISA) के रूप में भी जाना जाता है। यह विभिन्न सड़कों पर अनुमत गति सीमा को स्कैन करने और ड्राइवरों को उसके मुताबिक चेतावनी देने के लिए एक वीडियो कैमरा और जीपीएस से जुड़े स्पीड-लिमिट (गति-सीमा) डेटा की ओर इशारा करता है। यह भारत में बेची गई कई नई कारों पर मौजूद वर्तमान प्रणाली से अलग है। क्योंकि मौजूदा सिस्टम 80 किमी प्रति घंटे और 120 किमी प्रति घंटे पर वीडियो और ऑडियो चेतावनी जारी करता है। जबकि एक आईएसए सड़कों और हाईवे के विभिन्न खंडों पर निर्धारित अलग-अलग स्पीड लिमिट की लगातार निगरानी करेगा।
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यूरोपीय संघ में जुलाई से बिकने वाली सभी नई कारों में आईएसए को अनिवार्य बनाया जा रहा है। अमेरिका के इंस्टीट्यूट फॉर हाइवे सेफ्टी के एक सर्वेक्षण से यह भी पता चलता है कि देश के लगभग 60 प्रतिशत ड्राइवर अपने-अपने वाहनों में आईएसए के पक्ष में हैं।
क्या भारत में सभी नई कारों में आईएसए अनिवार्य होना चाहिए?
भारत ने सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए कुछ बहुत महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बेहतर सड़क बुनियादी ढांचा, परिभाषित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने वाली कारें और वाहनों की दुर्घटनाग्रस्तता को रेट करने के लिए Bharat NCAP (भारत एनसीएपी) की शुरुआत कुछ उदाहरण हैं। लेकिन कई लोगों द्वारा ड्राइवर जागरूकता को एक ऐसे क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता है जिस पर बहुत ध्यान देने की जरूरत है।
भारत ने सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए कुछ बहुत महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बेहतर सड़क बुनियादी ढांचा, परिभाषित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने वाली कारें और वाहनों की दुर्घटनाग्रस्तता को रेट करने के लिए Bharat NCAP (भारत एनसीएपी) की शुरुआत कुछ उदाहरण हैं। लेकिन कई लोगों द्वारा ड्राइवर जागरूकता को एक ऐसे क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता है जिस पर बहुत ध्यान देने की जरूरत है।
आईएसए ड्राइवरों को स्थानीय नियमों और विनियमों का बेहतर पालन करने में मदद कर सकता है। भारत जैसे विविध देश में विभिन्न स्थानीय नियमों के साथ, आईएसए की स्कैन करने और एडाप्ट करने की क्षमता बहुत उपयोगी साबित हो सकती है।
हालांकि, दूसरी तरफ, अगर आईएसए को अनिवार्य कर दिया जाता है, तो यह वाहनों की लागत मूल्य को और बढ़ा सकता है और इससे खरीद भावना कमजोर हो सकती है। विशेषज्ञों का तर्क है कि जबकि आईएसए तेज रफ्तार के खतरे का एकमात्र समाधान नहीं हो सकता है। लेकिन यह सुरक्षित कारों और सड़कों के लिए लड़ाई में एक कारगर उपाय साबित हो सकता है।