Supreme Court: Volkswagen पर उत्सर्जन संबंधी जांच को अन्य कंपनियों तक ले जाने पर विचार
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जर्मन वाहन निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन पर हाल ही में 100 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया। फॉक्सवैगन पर आरोप है कि कंपनी ने स्वैच्छिक रूप से 3.23 लाख कारें वापस लेने प्रस्ताव दिया था। उस समय खबरें आई थीं कि कंपनी की ई189 डीजल इंजन में एक ऐसी चीट डिवाइस लगी होती है, जो उत्सर्जन परीक्षण के दौरान को प्रदूषण स्तर को कम करके दिखाता है।
उच्चतम न्यायालय ने (एनजीटी) से कहा है कि वह कारों में उत्सर्जन को सीमित रखने के मानकों को चकमा देने वाले उपकरण लगाने के मामले में जर्मन कंपनी फाक्सवैगन के खिलाफ चल रही जांच का विस्तार कर अन्य कार विनिर्माताओं को भी उसके दायरे में लाने का विचार कर सकता है।
फॉक्सवैगन का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि केवल इसी कंपनी को ऐसे उत्सर्जन नियमों के उल्लंघन के संबंध में घसीटा जा रहा है जिनका ‘‘ अस्तित्व ही नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि कंपनी देश के मौजूदा उत्सर्जन प्रावधानों का पालन करती है और उसने एनजीटी द्वारा लगाये गये 100 करोड़ रुपये के जुर्माने की राशि भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पास जमा करा दिया है।
पीठ ने एनजीटी द्वारा जुर्माना लगाने के फैसले में दखल देने से इंकार कर दिया। हालांकि पीठ ने कंपनी के निदेशकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई करने से एनजीटी को रोक दिया। पीठ ने कहा कि सभी पक्षों के अधिकार खुले रहेंगे तथा फॉक्सवैगन समिति के आकलन को लेकर आपत्तियां एनजीटी के समक्ष रख सकती है।
शीर्ष न्यायालय ने एनजीटी को इस मामले में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय का पक्ष भी सुनने को कहा। फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने एनजीटी के 100 करोड़ रुपये के जुर्माने के 17 जनवरी के फैसले को शीर्ष न्यायालय में चुनौती दी है। एनजीटी ने 16 नवंबर 2018 को कहा कि फाक्सवैगन की डीजल कारों में प्रदूषण नियमों को चकमा देने वाले उपकरण के प्रयोग से यह माना जाएगा कि कंपनी ने पर्यावरण को क्षति पहुंचायी है।
उसने 100 करोड़ रुपये के जुर्माने को एक अंतरिम व्यवस्था बताया था और क्षति के बारे में एक संयुक्त टीम बनायी थी। इसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ,भारी उद्योग मंत्रालय, आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन आफ इंडिया (एआरएआई) तथा राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान को रखा गया। चार सदस्यीय इस समिति ने अपने आकलन के बाद कंपनी पर दिल्ली में स्वास्थ्य संबंधी नुकसान के लिए 171.34 करोड़ रुपये के जुर्माने की सिफारिश की है।