ग्राहकों की जेब पर ‘भारी’ पड़ेंगे नए बीएस-6 उत्सर्जन मानक, पेट्रोल-डीजल भी होंगे महंगे
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अगले साल एक अप्रैल 2020 से लागू होने वाले नए बीएस-6 (भारत स्टेज-6) उत्सर्जन मानक पर्यावरण के लिहाज से तो सुरक्षित हैं, लेकिन ग्राहकों की जेब पर भारी पड़ने वाले हैं। पहले कार कंपनियों ने नए मानकों के अनुरूप इंजन अपग्रेडेशन की लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल दिया, वहीं अब तेल कंपनियां भी नए मानकों की आड़ लेकर तेल की कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
बढ़ी BS6 इंजन वाली पेट्रोल गाड़ियों की कीमतें
देश की नंबर वन कार निर्माता कंपनी मारुति समेत कई कार कंपनियों ने अपने कुछ मॉडल्स के इंजन को बीएस-6 उत्सर्जन मानकों के मुताबिक अपग्रेड किया है। कार कंपनियों का कहना है कि नए मानकों के चलते इंजन को अपग्रेड करने की लागत में बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल कंपनियों ने केवल पेट्रोल इंजन को ही बीएस-6 में अपग्रेड किया है, वहीं डीजल इंजनों को लेकर अभी पशोपेश जारी है। जहां पेट्रोल गाड़ियों की कीमतों में 10 से 12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, वहीं अनुमान लगाया जा रहा है कि बीएस-6 डीजल गाड़ियों की कीमतें ढाई लाख रुपये तक बढ़ सकती हैं।
मशीनरी अपग्रेड को बताया वजह
वहीं ऑटो कंपनियों की बाद तेल मार्केटिंग कंपनियां भी बीएस-6 उत्सर्जन मानकों के अनुरूप तेल के उत्पादन के लिये बढ़ने वाली लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने की योजना बना रही हैं। कंपनियों को कहना है कि बीएस-6 मानकों को अनुरूप तेल बेचने के लिये उन्हें अपनी मशीनरी को अपग्रेड करना पड़ेगा, जिसके चलते उन्हें भारी निवेश की आवश्यकता पड़ेगी।
30 हजार करोड़ रुपये का खर्चा
खबरों के मुताबिक नए उत्सर्जन मानकों के मुताबिक ईंधन को और स्वच्छ करने के लिये उन्हें अपनी रिफाइनरियों को अपग्रेड करना पड़ेगा। हालांकि इसके लिये सरकार की मंजूरी का इंतजार है। एक अनुमान के मुताबिक कंपनियों को अपग्रेडेशन में 30 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। कंपनियों का कहना है कि इतने बड़े निवेश के बाद उसका रिटर्न भी चाहिये होगा, जिसमें प्रोफिट शामिल नहीं है।
दो रुपये तक बढ़ सकतीं हैं कीमतें
कंपनियों की योजना है कि लागत रकम की वापसी के लिये वे पेट्रोल-डीजल पर दो रुपये स्पेशल सेस या ड्यूटी लगा सकती हैं। जून 2014 में ऑटो फ्यूल विजन एंड पॉलिसी 2025 में स्वच्छ ईंधन के उत्पादन पर आने वाले अतिरिक्त निवेश की वापसी के लिये 75 पैसा सेस लगाने की सिफारिश की गई है। हालांकि पेट्रोल और डीजल पर यह रकम अलग-अलग हो सकती है और यह कंपनी के निवेश पर निर्भर करेगा। वहीं सरकार के साथ इसे लेकर बातचीत जारी है कि कैसे अपग्रेडेशन पर आने वाली लागत को वसूला जाए।
सरकार पहले ही बढ़ा चुकी हैं कीमतें
वहीं गाहकों पर यह दोगुनी मार होगी, क्योंकि बजट-2019-20 में सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। सरकार ने ईंधन पर एक रुपये अतिरिक्त स्पेशल एक्साइज और रोड एवं इंफ्रास्ट्रक्चर सेस के नाम पर एक रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।