भविष्य में बैटरी वाले ट्रकों से होगी माल ढुलाई: टाटा मोटर्स
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माना जाता है कि बैटरी से सिर्फ छोटे वाहन ही चल सकते हैं, लेकिन इस मिथक को तोड़ते हुए कुछ कंपनियों ने बैटरी चालित बसें उतारीं, जिनका आकार तो अभी छोटा है लेकिन इनमेें भविष्य की बड़ी तस्वीर दिखाई देती है। टाटा मोटर्स ने इस दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए 15वें ऑटो एक्सपो में बैटरी चालित ट्रक का कॉन्सेप्ट व्हीकल पेश किया है। लॉजिस्टिक क्षेत्र में भविष्य के इस वाहन का क्या असर होगा, इस पर अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने टाटा मोटर्स के अध्यक्ष (वाणिज्यिक वाहन) गिरिश वाघ से बातचीत की। पेश है अंश:
प्रश्न: सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद अभी वाणिज्यिक वाहन श्रेणी में ई-व्हीकल जोर नहीं पकड़ सका है। ऐसे में आपके ई-ट्रक की मांग कैसे आगे बढ़ सकेगी?
उत्तर: हमने इस तरह का कॉन्सेप्ट वाहन तैयार करने से बाजार को बखूबी टटोला है। दरअसल, खुदरा वितरण के क्षेत्र में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां ऐसी हैं, जो पर्यावरण के सुरक्षित वाहनों को अपने बेडे़ में शामिल करना चाहती हैं। वही, कंपनियां चाहती हैं कि लास्ट माइल डिस्ट्रीब्यूशन के लिए बैटरी से चलने वाले ट्रक बाजार में उतारे जाएं। हमने इसी तरह की अपील पर आगे बढ़ते हुए एक कॉन्सेप्ट व्हीकल बनाकर ग्रेटर नोएडा में चल रहे ऑटो एक्सपो में पेश किया है। यह ट्रक एक बार चार्ज होने पर नौ टन क्षमता का वजन लेकर करीब 120 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है।
प्रश्न: एक बार चार्जिंग में 120 किमी की दूरी ट्रकों के लिए कम नहीं लगती है?
उत्तर: यह तो कॉन्सेप्ट व्हीकल है, जो ग्राहक चाहेंगे कि उन्हें एक चार्ज में ज्यादा दूरी तय करने वाला वाहन चाहिए तो उनके लिए वाहन में बैटरी की क्षमता बढ़ाई जाएगी। लेकिन बैटरी की पावर बढ़ाने पर वाहन की कीमत भी बढे़गी, क्योंकि अभी ई-व्हीकल में तो लगभग आधी कीमत बैटरी पैक की ही पड़ रही है। आगे बाजार की मंशा देखते हुए हम बैटरी की क्षमता भी बढ़ाएंगे।
प्रश्न: इस वाहन की अनुमानित कीमत क्या होगी?
उत्तर: अभी इसे बिक्री या डिलीवरी के लिए तो बनाया नहीं गया है। लिहाजा अभी इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। जब इसकी बिक्री शुरू होगी, उससे पहले कीमत की घोषणा कर दी जाएगी। अभी तक हमने इसे सिर्फ इसलिए पेश किया है, ताकि बाजार में इस बारे में पूछताछ शुरू हो जाए। इससे हमें अंदाजा मिल जाएगा कि कहां-कहां इसके संभावित खरीदार हो सकते हैं।
प्रश्न: ई-वाहन की बात करें तो बसों में अभी क्या स्थिति है?
उत्तर: बसों की श्रेणी में भी हमने 12 मीटर वाली बस तैयार की है। इससे पहले केंद्र सरकार की फेम-1 योजना के तहत हमने लखनऊ, जम्मू, कोलकाता, इंदौर और गुवाहाटी में बैटरी से चलने वाली बसें उतारी। वहां हमें इसके रखरखाव और चार्जिंग ढांचे भी तैयार करने की जिम्मेदारी मिली है, ताकि इनका उपयोग बढ़ाया जा सके। अब फेम-2 योजना में भी सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं और हमने मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद का टेंडर जीत लिया है।
बाजार में बड़े वाणिज्यिक वाहनों को लेकर माहौल
प्रश्न: बाजार में अभी बड़े वाणिज्यिक वाहनों को लेकर माहौल उत्साहजनक नहीं है। साथ ही बीएस-6 मानक भी लागू हो रहा है जिससे कीमत और बढ़ेगी। ऐसे में जब सस्ते ट्रक नहीं बिक पा रहे तो महंगे ट्रकों को कैसे बेचा जा सकेगा?
उत्तर: बीएस-6 लागू करने का फैसला सरकार का है तो यह लागू होगा ही। हमारी कोशिश है कि हम इस तरह का वाहन ग्राहकों को दें जो उन्हें पुराने वाहनों से बेहतर रिटर्न दे। इसके लिए हमने दो-तीन बुनियादी चीजों पर ध्यान दिया है। पहला कि ट्रकों का ऑपरेटिंग इकोनॉमिक्स उनके पक्ष में हो। बीएस-6 मानक के ट्रक बीएस-4 के मुकाबले न सिर्फ कम धुआं छोड़ते हैं, बल्कि उनका माइलेज भी ज्यादा है। हमने इंजन को भी और शक्तिशाली बनाया है।
पहले जिस ट्रक में 230 हार्सपावर का इंजन होता था, उसमें 300 एचपी का इंजन लगाया। बीएस-6 ट्रकों में कमिन्स का 6.7 लीटर इंजन लगाया है, जो पूरी दुनिया में छह सिलेंडर इंजन की श्रेणी में सबसे ज्यादा बिकता है। ट्रक के ड्राइवर केबिन को और आरामदेह व सुविधाजनक बनाने के साथ उसके इंटीरियर को कार जैसा रखा है। स्टीयरिंग व्हील भी कार की तरह टच स्क्रीन रखी है और इंफोटेनमेंट सिस्टम लगाया है। अब ट्रक भी कनेक्टेड व्हीकल बन गया, ताकि परिवहन का बेहतर प्रबंधन हो सके।