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बाहर के मैकेनिक से कार ठीक कराना पड़ सकता है भारी, चोरी हो सकती है गाड़ी, पढ़ें यह खबर

Tue, 25 Jun 2019 11:16 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 25 Jun 2019 11:16 PM IST
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Car Theft - फोटो : सांकेतिक

अगर आप अपनी कार की सर्विस या रिपेयरिंग कंपनी में न करवा कर बाहर के मैकेनिकों से करवाते हैं, तो सावधान हो जाएं। ऐसा करना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है, यहां तक कि हो सकता है कि कुछ दिनों बाद आपकी कार आपके घऱ के बाहर से ही चोरी हो जाए और आपको पता ही न चले।

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जांच लें इंजन

अगली बार से जब आप कार की सर्विस किसी अनऑथराइज्ड वर्कशॉप से कराने के बाद अपनी कार का इंजन जरूरत जांच लें। आप सोच रहे होंगे कि इंजन जांचने की वजह क्या है, शायद इसलिये कि मैकेनिक ने इंजन के पार्ट्स बदल दिये हों। लेकिन बात इससे कहीं आगे है। हो सकता है कि वर्कशॉप से निकलने के बाद आपका कोई पीछा कर रहा हो और आपका पता भी न चले।
 

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जीपीएस से कार चोरी

पिछले दिनों ग्रेटर नोएडा में ऐसे गिरोह का पर्दाफाश हुआ, जो कार चुराने में माहिर था। और कार चुराने के लिए जिस तरीके का इस्तेमाल करता था, उसे सुनकर तो पुलिस भी हैरान रह गई। इन चोरों का कार चोरी करने का तरीका ऐसा था कि आप इसे सोच भी नहीं सकते। ये चोर कार चोरी करने के लिए जीपीएस का ही इस्तेमाल कर रहे थे, वो जीपीएस जिसका इस्तेमाल हम कार चोरों को पकड़ने के लिए करते हैं।
 

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मैकेनिकों से सांठगांठ

पुलिस के मुताबिक ये चोर ऐसे अनऑथराइज्ड मैकेनिकों के संपर्क में रहते थे, जहां लोग पैसे बचाने के चक्कर में कार ठीक कराने पहुंच जाते हैं। ये चोर उन मैकेनिकों से सांठ-गांठ करके कार में ही जीपीएस ट्रैकर लगा देते थे। ये जीपीएस कार के इंजन में लगाते थे, ताकि कार मालिक को पता ही न चले। जिसके बाद ये कार को ट्रैक करते रहते थे और मुफीद जगह पा कर डुप्लीकेट चाबी की मदद से कार चुरा लेते थे।  
 

डुप्लीकेट चाबी से चोरी

पुलिस का कहना है कि इस मामले में एक होम्योपैथ डॉक्टर और उसका साथी शामिल है। डाक्टर अपने क्लीनिक पर आने वाले मरीजों और दोस्तों की कारों को कुछ वर्कशॉप पर ले जाते थे, जहां उनकी कारों में जीपीएस ट्रैकर लगाने के साथ डुप्लीकेट चाबी बनवाते थे। पूछताछ में खुलासा हुआ कि मेरठ का एक गैंग इसमें शामिल था, जो चोरी की गाड़ियों को दूसरे राज्यों में बेचता था या फिर उनके पुर्जे खोल कर बेच देते थे।
 

ऑथराइज्ड सेंटर में ही कराएं सर्विस

पुलिस का कहना है कि इस खेल में और भी कई दूसरे वर्कशॉप के मैकेनिक शामिल हो सकते हैं। पुलिस के मुताबिक जीपीएस को ये कार बैटरी के नजदीक लगाते थे, जहां से उसे पावर मिलती रही। पुलिस ने लोगों से अपील की है वे ऑथराइज्ड सेंटर पर ही कार की सर्विस करायें, साथ ही गैराज से कार आने के बाद उसकी ठीक से जांच करें।       
 

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