... तो बेकार हो जाएंगी आपकी पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियां
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डीजल व पेट्रोल की कीमतें जितनी तेजी से बढ़ती हैं लोग उतना ही तनाव में आ जाते हैं। पेट्रोल-डीजल की घटती बढ़ती कीमतों का अगर चक्कर खत्म हो जाए तो कितना अच्छा रहे और इससे भी ज्यादा मजेदार तब होगा जब डीजल-पेट्रोल की उपयोगिता ठीक वैसे ही खत्म हो जाए जैसे पिछले दिनों 500 व हजार के नोट चलन से बाहर हो गए। ये सिर्फ बातें नहीं है अगर सरकार की नई नीतियों पर आप गौर फरमाएं तो 2032 तक देश में चलने वाला हर वाहन इलेक्ट्रिक हो जाएगा। नीति (NITI) आयोग ने सुझाव दिया है कि कंपनियां 2018 तक खुद को बैट्री प्लांट पर शिफ्ट करना शुरू कर दें।
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NITI का पूरा मतलब है नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेंशन इंडिया यानी कि सरल शब्दों में इसे हम नीति आयोग कहते हैं। यह भारत सरकार का थिंक टैंक है जो कि भविष्य से जुड़े कई जरूरी सुझावों से सरकार को अवगत कराता है तथा उनको पूरा करवाने के लिए मदद करता है। अगर इलेक्ट्रिक वाहनों की ब्याज दरें कम हैं तो वो भी इसके बदौलत ही संभव हुआ है। यह बात एक ऐसे समय आई जब पारंपरिक ईंधन पर चल रही कार की बिक्री ने वित्त वर्ष 2016-17 में 30 लाख का आंकड़ा पार किया है।
नीति आयोग ने 90 पेज की रिपोर्ट तैयार की
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एक दिलचस्प जानकारी आपको देते चलें कि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी पेट्रोल व डीजल आयात करता है जिसे भारत 2030 घटाकर आधा करना चाहता है। अगर वास्तव में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को यहां पर डेवलप किया गया तो इलेक्ट्रिक वाहनों पर शिफ्ट होने में ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी। मौजूदा समय में महिंद्रा एंड महिंद्रा ई2ओ, ई वेरीटो और ई मैक्सिमो जैसी प्योर इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री कर रही है। कुछ कंपनियां अपने हाइब्रिड वाहनों को यहां बेच रही हैं।