मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी में होने जा रहे हैं कई बदलाव, इरडा ने की कई सिफारिशें
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भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने वाहन बीमा पॉलिसी (Motor Insurance Policy) को सरल बनाने के लिए एक मसौदा (ड्राफ्ट) पेश किया है। इस मसौदे में विभिन्न बदलावों के लिए सिफारिश की गई है, जिससे उपभोक्ताओं को कुछ हद तक बीमा को सरल बनाकर फायदा पहुंचाया जा सके।
मोटर ऑन डैमेज की होगी समीक्षा
इस मसौदे के जरिए वाहनों का प्रीमियम और मोटर ऑन डैमेज की रूपरेखा की समीक्षा की जाएगी। साथ ही, इसके जरिए इंश्योरेंस कंपनी को पॉलिसी के साथ जानकारी भी देनी होगी, जिसमें सम इंश्योर्ड भी शामिल है। बता दें कि सम इंश्योर्ड में ग्राहकों को वाहन के पूरे नुकसान पर भुगतान करना होता है।
24 घंटे के अंदर करना होगा क्लेम
इस पॉलिसी के जरिए इंश्योरेंस कंपनियों को जालसाजी की घटनाओं को पकड़ने में मदद मिलेगी। साथ ही, इसमें वाहन के नुकसान होने के 24 घंटे के अंदर क्लेम की सूचना, सम इंश्योर्ड में डिडक्टिबल को शामिल किया गया है।
इन पर रखी जाएगी नजर
ड्राइविंग के आधार पर होने वाले इंश्योरेंस को यूसेज बेस्ड इंश्योरेंस नाम दिया गया है। टेलिमैटिक्स डिवाइसेस से जुटाए गए डाटा में तेजी से एक्सेलरेटर दबाना, कार का कुल कवर डिस्टेंस, तेजी से ब्रेक लगाना, गाड़ी को नुकसान होने के कारण, कोनों पर तेजी से ड्राइविंग, तेजी से दिशा बदलना और एयरबैग्स का फंक्शन जैसे पैटर्न शामिल किए जाएंगे।
क्या होगा फायदा
फिलहाल मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी की गणना इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू से होती है। जिसमें गाड़ी का मॉडल, निर्माण वर्ष, इंजन कैपेसिटी और ज्योग्राफिकल जोन शामिल है। लेकिन टेलीमैट्रिक्स आने के बाद अगर आप ठीक से गाड़ी चलाते हैं, तो आपको कम प्रीमियम चुकाना होगा। वहीं इस टेक्नोलॉजी की मदद से व्हीकल ट्रैकिंग और रोड साइड असिस्टेंस में भी मदद मिलेगी।