नीति आयोग पर गडकरी का पलटवार, कहा- आयोग नहीं लगा सकता पेट्रोल, डीजल वाहनों पर बैन

ऑटो डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 24 Aug 2019 01:57 PM IST
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गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी
गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी - फोटो : अमर उजाला

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केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर से ऑटो सेक्टर को बड़ी राहत दी है। मंदी की मार और डीजल इंजन बंद करने की खबरों से परेशान ऑटो सेक्टर को सांत्वना देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियों को बंद करने का कोई इरादा नहीं है।

सरकार ने कोई प्रतिबंध नहीं लगाया

नितिन गडकरी ने शुक्रवार को थिंक टैंक नीति आयोग की सिफारिशों को दरकिनार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है और यह फैसला परिवहन मंत्री को लेना है, न कि नीति आयोग को। नीति आयोग ने प्रस्ताव दिया था कि तिपहिया वाहनों को 2023 और 150सीसी से कम क्षमता वाले दो पहिया वाहनों को 2025 तक सड़कों से हटा कर उनकी जगह इलेक्ट्रिक वाहन लाए जाएं।

नीति आयोग की आलोचना

नीति आयोग के इस कदम की ऑटोमोबाइल जगत में काफी आलोचना हुई थी। जिसका असर यह हुआ कि ऑटो इंडस्ट्री को 20 साल बाद जबरदस्त मंदी का सामना करना पड़ा। नितिन गडकरी ने कहा कि परिवहन मंत्री होने के नाते मैंने नीति आयोग के बहुत से प्रस्तावों को मंजूरी दी है, लेकिन इस मामले में मैं परिवहन मंत्री हूं और फैसला मुझे लेना है, न कि नीति आयोग को।

इलेक्ट्रिक वाहनों को लाने की कोई समयसीमा नहीं

नई दिल्ली में आयोजित माइंडमाइन समित में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि मैंने हमेशा से कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को लाने की कोई समयसीमा नहीं है और हम पेट्रोल और डीजल वाहनों के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन अब हम इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित कर रहे हैं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इलेक्ट्रिक परिवहन हमारी प्राथमिकता है। ऑटो इंडस्ट्री की अहमियत को देखते हुए हम पब्लिक ट्रांसपोर्ट में वैकल्पिक ईंधन और इलेक्ट्रिक को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पेट्रोल डीजल पर प्रतिबंध नहीं लगाने जा रहे हैं।   

वीके सारस्वत ने किया समर्थन

गडकरी की यह बयान नीति आयोग की योजना पर करारी चोट है। गडकरी के बयान का समर्थन करते हुए नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत ने कहा कि देश के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों पर निर्भरता सही नहीं है। उन्होंने कहा कि आज हर कोई बैटरी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की बात कर रहा है। नीति आयोग ने भी कुछ लक्ष्य निर्धारित किए हैं, लेकिन उन्हें इस बात की खुशी है कि उनका फैसला परिवहन मंत्रालय करेगा, ना कि नीति आयोग। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बीएस-6 मानक लागू होने से इससे सेक्टर में एनपीए भी बढ़ सकता है। इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने शुक्रवार को एलान किया था कि 2020 तक खरीदे गए बीएस-4 वाहन का रजिस्ट्रेशन पूरी अवधि तक जारी रहेगा।

कोई डेडलाइन तय नहीं

इससे पहले गडकरी ने कहा था कि मंत्रालय की तरफ से इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर ऐसी कोई डेडलाइन तय नहीं की गई है। नीति आयोग ने ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी करके इंटरनल कंबशन इंजन वाले वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन उतारने के लिए समयसीमा तय की थी। गडकरी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को उतारने को लेकर कोई समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि डीजल से चलने वाले वाहनों को सड़क से हटाने को लेकर समयसीमा थोपने का कोई इरादा नहीं है।   

नीति आयोग ने ड्राफ्ट में तय की थी समयसीमा

इस साल जून में सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के अगवाई में बनी स्टीयरिंग कमेटी ने जारी रिपोर्ट में कहा था कि इलेक्ट्रिक वाहनों को सड़क पर उतारने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जाए, साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों को कम करने के लिए देश में ही फैक्टरियां लगा कर बैटरियों का निर्माण किया जाए।
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