क्यों लगा फॉक्सवैगन पर 100 करोड़ का जुर्माना, पढ़ें क्या है प्रदूषण फैलाने वाली 'चीट डिवाइस'
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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण यानी एनजीटी से जर्मन वाहन निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन को बड़ा झटका लगा है। एनजीटी ने चीट डिवाइस लगाने के आरोप में फॉक्सवैगन से कहा है कि कंपनी शुक्रवार शाम 5 बजे तक 100 करोड़ रुपए जमा कराए। अगर कंपनी जुर्माना जमा काराने में असमर्थ होती है तो ऐसी सूरत में कंपनी के देश में कंट्री हेड की गिरफ्तारी के आदेश हो सकते हैं, साथ ही कंपनी की संपत्तियों की भी कुर्की हो सकती है। आखिर क्या है वो 'चीट डिवाइस', जिससे फैल रहा है प्रदूषण...
नहीं मिला कोर्ट से स्टे
गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए एनजीटी के चेयरपर्सन आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली बेंच ने कंपनी के 100 करोड़ रुपए जमा नहीं कराने पर प्रतिक्रिया देते हुए यह आदेश दिया। बेंच ने कहा कि जब कंपनी को कोई स्टे नहीं मिला है, ऐसे में कंपनी ने अभी तक जुर्माना क्यों नहीं जमा कराया है। बेंच ने कंपनी को राशि जमा कराने के लिए और समय देने से इंकार कर दिया। साथ ही यह आदेश दिया कि कंपनी हलफनामा देकर बताए कि शुक्रवार शाम 5 बजे तक 100 करोड़ रुपए जमा करा दिए जाएंगे।
बनाई थी 4 सदस्यीय समिति
याचिकाकर्ता सतविंदर सिंह सोंधी ने अपनी याचिका में फॉक्सवैगन पर प्रदूषण उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था और कंपनी की गाड़ियां पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने 16 नवंबर को कहा था कि कंपनी यह राशि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जमा कराए। कंपनी पर भारत में फॉक्सवैगन की डीजल कारों में 'चीट डिवाइस' लगाने का आरोप था, जिससे पर्यावरण को नुकसान हुआ। एनजीटी ने इस मामले में एक कमेटी गठित करने का आदेश दिया था और एक माह के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा था। इस कमेटी का सदस्य वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया को बनाया था। बेंच ने कमेटी को पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन करने को कहा था।
48.68 टन नाइट्रोजन ऑक्साइड का किया उत्सर्जन
अपनी जांच रिपोर्ट में समिति ने अत्यधिक नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) के उत्सर्जन के चलते फॉक्सवैगन कंपनी पर 171.34 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन के चलते वायु प्रदूषण हुआ और पर्यावरण के साथ लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा। समिति ने अपनी रिपोर्ट में आकलन किया था कि फॉक्सवैगन की चीटिंग डिवाइस लगी कारों ने राजधानी क्षेत्र में 2016 में लगभग 48.68 टन नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन किया।
क्या होता है चीट डिवाइस?
फॉक्सवैगन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि 2015 में कंपनी ने स्वैच्छिक रूप से 3.23 लाख कारें वापस लेने प्रस्ताव दिया था। उस समय खबरें आई थीं कि कंपनी की ई189 डीजल इंजन में एक ऐसी चीट डिवाइस लगी होती है, जो उत्सर्जन परीक्षण के दौरान को प्रदूषण स्तर को कम करके दिखाता है। 'चीट डिवाइस' डीजल इंजन में लगाया जाने वाला एक ऐसा सॉफ्टवेयर होता है जिससे उत्सर्जन टेस्ट में हेरफेर किया जाता है। लेकिन परीक्षण में यह बात सामने आई थी कि वाहनों में अतिरिक्त नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन के स्तर का कारण बन रहा है।
अमेरिकी कंपनी ने पकड़ी थी चीट डिवाइस
बता दें कि 2015 में एक अमेरिकी एजेंसी ने भी फॉक्सवैगन की कारों में इस चीट डिवाइस को पकड़ा था। वहीं कंपनी ने भी माना था कि प्रदूषण जांच को चकमा देने के लिए उन्होंने 1.1 करोड़ कारों के सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की थी। एमिशन टेस्ट में हेरफेर करने के लिए कंपनी ने इन कारों में चीट या डिफीट डिवाइस लगाए थे।
अमेरिका में वापस बुलानी पड़ी थीं 3.50 लाख डीजल कारें