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MV Act: बिहार,उत्तराखंड में PUC प्राप्त करने वाली कारों की संख्या में नौ गुना वृद्धि

Fri, 20 Sep 2019 12:15 PM IST
Bani Kalra ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Bani Kalra Updated Fri, 20 Sep 2019 12:15 PM IST
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MV Act: Nine-fold rise in cars seeking PUC in Bihar, Uttarakhand
PUC - फोटो : Amar Ujala

नया मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act 2019) लागू होने के बाद पिछले 18 दिनों में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) प्राप्त करने वाले वाहनों की संख्या में नौ गुना तक की वृद्धि हुई है। बिहार और उत्तराखंड में अगस्त की तुलना में जारी किए गए पीयूसी की संख्या में अधिकतम वृद्धि देखी गई है।

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इन 9 राज्यों में हुई प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र बनाने में सबसे ज्यादा वृद्धि

यहां हम 9 राज्यों के पिछले तीन महीनें के आंकडें बता रहे हैं जहां प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र बनाने में वृद्धि देखी गई।

 

बिहार

जुलाई 2019: 16,276 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
अगस्त 2019: 31,707 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
सितम्बर 2019: 2,87,303 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

छतीसगढ़

जुलाई 2019: 38,138 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
अगस्त 2019: 37961 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
सितम्बर  2019: 84871 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

गुजरात

जुलाई 2019:63220 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
अगस्त 2019: 94094 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
सितम्बर  2019: 2,96,409 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

हिमाचल प्रदेश:

जुलाई 2019: 93 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
अगस्त 2019: 890 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
सितम्बर  2019: 19787 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

 
महाराष्ट्र

जुलाई 2019: 33,841 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
अगस्त 2019: 36,777 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
सितम्बर  2019: 59,437 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

 
तमिलनाडू

जुलाई 2019: 1,59,032 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
अगस्त 2019: 1,49,042 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
सितम्बर  2019: 1,05,111 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

 
उत्तराखंड

जुलाई 2019: 7,178 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
अगस्त 2019: 23,417 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
सितम्बर  2019: 2,25,848 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

 
उत्तर प्रदेश

जुलाई 2019: 2,12,744 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
अगस्त 2019: 3,03,084 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
सितम्बर  2019: 11,25,012 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें

 
वेस्ट बंगाल

जुलाई 2019: 31,732 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
अगस्त 2019: 48,390 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
सितम्बर  2019: 63,797 प्रदूषण प्रमाणपत्र बनें
 

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कैसे चेक होता है प्रदूषण  

प्रदूषण की जांच के लिए एक गैस एनालाइजर को एक ऐसे कंप्यूटर से जोड़ा जाता है जिसमें कैमरा और प्रिंटर भी जुड़ा हो। यह गैस एनालाइजर गाड़ी से निकलने वाले प्रदूषण  के आंकड़ों की जांच करता है और इसे कंप्यूटर को भेजता है। जबकि कैमरा गाड़ी के लाइसेंस प्लेट की फोटो लेता है। अगर गाड़ी से निश्चित दायरे के अंदर प्रदूषण निकल रहा हो, तो पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।
 

आंकड़े बताते हैं

परिवहन विभाग के अनुसार, दिल्ली में प्रतिदिन 217.7 टन कार्बन मोनोऑक्साइड, 84.1 टन नाइट्रोजन ऑक्साइड और 66.7 टन हाइड्रोकार्बन्स का उत्सर्जन सिर्फ गाड़ियों से होता है। जानकारी के लिए बता दें कि बिना पॉल्युशन सर्टिफिकेट पर 10,000 रुपये का जुर्माना है।

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