मारुति सुजुकी ने ऑल्टो, स्विफ्ट और डिजायर का घटाया उत्पादन, तीसरी बार की कटौती
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देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने अप्रैल में अपने वाहनों के उत्पादन में 10 फीसदी की कटौती की है। कंपनी ने इस साल लगातार तीसरी बार अपने उत्पादन में कटौती की है।
कंपनी ने बृहस्पतिवार को बताया कि अप्रैल में उसने सुपर कैरी एलसीवी समेत कुल 1,47,669 वाहनों का उत्पादन किया। यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि के 1,63,368 इकाई के मुकाबले 9.6 फीसदी कम है। इसके अलावा ऑल्टो, स्विफ्ट और डिजायर जैसे यात्री वाहनों के उत्पादन में भी कटौती की गई है।
कंपनी ने अप्रैल में 1,44,702 यात्री वाहनों का उत्पादन किया था, जो 2018 की समान अवधि के 1,61,370 इकाई के मुकाबले 10.3 फीसदी कम है। वाहनों के कॉम्पैक्ट सेगमेंट में भी मामूली कटौती देखने की मिली।
अप्रैल 2018 के 83,709 इकाइयों के मुकाबले कंपनी ने इस अप्रैल में 83,411 इकाइयों का उत्पादन किया। एमएसआई ने कारों के कॉम्पैक्ट सेगमेंट में 11.4 फीसदी, यूटिलिटी वाहन में 8.4 फीसदी और वैन के उत्पादन में 25.8 फीसदी की कटौती की है।
फरवरी-मार्च में भी की थी कटौती
एमएसआई ने इससे पहले फरवरी और मार्च में भी उत्पादन घटाया था। फरवरी में कंपनी ने कुल 1,48,959 वाहनों का उत्पादन किया था। यह आंकड़ा फरवरी, 2018 के 1,62,524 इकाइयों के मुकाबले आठ फीसदी कम है।
कंपनी की गुरुग्राम और मानेसर संयंत्र की सालाना उत्पादन क्षमता 15.5 लाख इकाई है। वहीं, सुजुकी के स्वामित्व वाली गुजरात के हंसलपुर में स्थित संयंत्र की सालाना उत्पादन क्षमता 2.5 लाख इकाई है।
शुरुआती अनुमान के मुताबिक पेट्रोल कारों के दाम 25,000-60,000 रुपये बढ़ेंगे। डीजल कारों के दाम एक से 2.5 लाख रुपये तक बढ़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि नए प्रदूषण मानकों का असर छोटी कारों पर ज्यादा होगा। यूरोप में भी यूरो-6 मानक लागू होने के बाद डीजल कारों की ग्रोथ कम हुई है। डीजल कारें बंद करने से मारुति का मार्केट शेयर घटने की उम्मीद नहीं है। भार्गव के अनुसार दाम बढ़ने के कारण कोई भी कंपनी छोटी डीजल कारें नहीं बनाना चाहेगी।
अभी मारुति की विटारा ब्रेजा, एस क्रॉस ही सिर्फ डीजल वर्जन में आ रही है। मारुति की विटारा ब्रेजा और एस-क्रॉस सिर्फ डीजल वर्जन में आती हैं। स्विफ्ट, बलेनो, डिजायर, सियाज और अर्टिगा के पेट्रोल और डीजल दोनों वर्जन हैं।
फैसले की 2 सबसे बड़ी वजह
बिक्री का ट्रेंड: 6 साल में डीजल कार की बिक्री आधी रह गई है
2012-13 में डीजल कारों की हिस्सेदारी 50% थी। अब यह घटकर आधी रह गई है।
वजह- पेट्रोल और डीजल के दामों में 5 साल पहले अंतर 27 रुपए का था, अब 10 रुपए है।
प्रदूषण की वजह से डीजल कारों पर सख्ती हो रही है। दिल्ली में डीजल कारों की रजिस्ट्रेशन अवधि 10 साल हैै, जबकि पेट्रोल वर्जन का 15 साल है।
पेट्रोल-डीजल कारों में अंतर एक लाख से 2.5 लाख तक हो जाएगा
मारुति के ईडी सीवी रमन ने बताया था कि अभी पेट्रोल और डीजल कारों के दाम में अंतर एक लाख रुपए है। बीएस-6 लागू होने के बाद यह अंतर 2.5 लाख रुपए तक हो जाएगा। छोटी कारों पर असर पड़ेगा। हर साल 18 लाख छोटी कारें बिकती हैं।
लगातार तीसरी तिमाही घटा मारुति का मुनाफा, मार्च तिमाही में 4.6% गिरावट
भारत की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी का मुनाफा 2018-19 की आखिरी तिमाही और साल, दोनों में घट गया है। जनवरी से मार्च के दौरान मुनाफे में 4.6% और सालाना में 2.9% गिरावट आई है। हालांकि रेवेन्यू तिमाही आधार पर 0.7% और सालाना 6.3% बढ़ा है। मुनाफे में लगातार तीसरी तिमाही गिरावट आई है। सितंबर तिमाही में यह 9.82% और दिसंबर तिमाही में 17.22% घट गया था।