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वाहन इंश्योरेंस बेचने के लिए एजेंट कर रहे हैं हेर-फेर, आप भी तो नहीं हो रहे शिकार

Sun, 11 Nov 2018 10:54 AM IST
ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 11 Nov 2018 10:54 AM IST
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know how to save your insurance claim in small tips
car insurance

बाजार में मिल रहे डिस्काउंटेड ऑफर्स पर आप ध्यान न देंं तो आप काफी हद तक इंश्योरेंस में होने वाली धोखेधड़ी से बच सकते हैं। कंपनियां पॉलिसी को कीमत के हिसाब से आकर्षक बनाने के लिए इसमें कई प्रकार के हेर-फेर करती हैं। आइए आपको बताते हैं कि कैसे आप कुछ तरीके अपनाकर अपने इंश्योरेंस के सही मायने में फायदे उठा सकते हैं। 

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सबसे पहले जान लें कि जो इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स आपको बेचा जा रहा है वो कहीं मिस-सेलिंग तो नहीं है। अगर आपको इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेचने वाला भारी-भरकम छूट दे रहा है तो हो सकता है कि आप मिस-सेलिंग यानि गलत जानकारी देकर चीज बेचने का शिकार हो रहे हैं।  
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आईडीवी ( इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू) का रखें विशेष ध्यान
इंश्योरेंस लेते समय ध्यान रखें कि एजेंट से ज्यादा मोल भाव न करें। अगर आप ऐसा करेंगे तो एजेंट आपकी कार की वैल्यू घटा कर आपको प्रीमियम का फायदा तो दे देगा, लेकिन हानि होने पर आप कलेम करेंगे तो आपको कम अमाउंट मिलेगा क्योंकि आपकी कार को कम आईडीवी दिया गया था। इससे आपकी इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (आईडीवी) कम हो जाएगी।
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car insurance


गौरतलब हो,जब मौद्रिक नुकसान की भरपाई इंश्योरेंस कराने वाला व्यक्ति करता है तो इसे डिडक्टबल कहा जाता है। यह जरूरी या स्वैच्छिक होता है। एक ऐसी पॉलिसी, जिसमें कार की आईडीवी करीब 6.5 लाख रुपए है और इंश्योरेंस 18,930 रुपए का लोअर प्रीमियम ऑफर करता है तो इसमें आपको करीब 5,000 रुपए का वॉलन्टरी डिडक्टबल कंपोनेंट भी ऑफर किया जाता है।

ध्यान रहें कि अगर आप दूसरे इंश्योरर के पास शिफ्ट होते हैं और पिछले इंश्योरर के साथ किए गए क्लेम के बारे में नहीं बताते हैं तो आपको नए इंश्योरेंस से डिस्काउंटेड प्रीमियम मिल सकता है और यह आपके लिए फायदे का सौदा हो सकता है। 

असल समस्या उस समय खड़ी होती है, जबकि आप नए इंश्योरर के यहां कोई क्लेम करते हैं। कंपनी आपकी क्लेम हिस्ट्री को जांचने के लिए आपके पिछले इंश्योरर से संपर्क करेती है। अगर क्लेम के समय पॉलिसीधारक की तरफ से कोई गलती सामने आती है तो इंश्योरेंस कंपनी उनके क्लेम को खारिज भी कर सकती है।

आमतौर पर एजेंट्स पॉलिसी बेचते समय बॉयर्स को ऐसी ट्रिक्स के बारे में बताते हैं और कंज्यूमर भी अक्सर राजी हो जाते हैं, लेकिन क्लेम खारिज होने पर उन्हें ही इसका नतीजा भुगतना पड़ता है।

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