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सरकार ने ‘बेची’ आपकी गाड़ी और लाइसेंस की जानकारी, कमाए 65 करोड़ रुपये!

Mon, 15 Jul 2019 04:32 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 15 Jul 2019 04:32 PM IST
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government earned rs 65 crores from sell off vahan and sarathi database details to third party
traffic in prayagraj

सरकार ने देशभर में रजिस्टर्ड गाड़ियों और ड्राइविंग लाइसेंस का डाटाबेस निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ साझा किया है। सरकार ने इसके जरिये 65 करोड़ रुपये की कमाई की है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कंपनियों को डाटाबेस की सीमित पहुंच ही दी गई है।

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डाटाबेस में 25 करोड़ वाहन

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में बताया कि सरकार ने 32 सरकारी और 87 निजी क्षेत्र की कंपनियों को देशभर में रजिस्टर्ड गाड़ियों और ड्राइविंग लाइसेंस का डाटाबेस एक्सेस करने के अधिकार दिये हैं। देश में मौजूदा वक्त में केंद्रीय वाहन डाटाबेस में 25 करोड़ वाहन और सारथी डाटाबेस में 15 करोड़ ड्राइविंग लाइसेंस रजिस्टर्ड हैं।
 

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निजी जानकारियां साझा नहीं

हालांकि सरकार का कहना है कि निजी क्षेत्र की कंपनियों को वाहन डाटा उपलब्ध कराया गया है, लेकिन मालिकों की निजी जानकारियां साझा नहीं की गई हैं। इस डाटाबेस में वाहन का प्रकार, मॉडल, रंग, सीटों की संख्या, चैसिस नंबर, ईंधन का प्रकार, फाइनेंस और इंश्योरेंस कंपनी का नाम जैसी जानकारियां ही दी गई हैं। जबकि सारथी डाटा की उतनी मांग नहीं है।
 

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तीन करोड़ रुपये में डाटा

हालांकि निजी कंपनियां बल्क डाटा शेयरिंग पॉलिसी एंड प्रोसिजर के तहत केवल एक करोड़ रुपये चुका कर एक साल तक के लिये ही डाटा एक्सेस कर सकती थीं, लेकिन अब इसे बढ़ा कर तीन करोड़ रुपये कर दिया गया है। जबकि शैक्षणिक संस्थान अंदरूनी शोध कार्यों के लिए पांच लाख रुपये चुका कर डाटा हासिल कर सकते हैं।
 

50 रुपये प्रति रिकॉर्ड चुकाने होंगे

मंत्रालय ने डाटा हासिल करने को लेकर कुछ नियम बनाए हैं, जिसमें एक तय प्रारूप में पैसे चुका कर बल्क डाटा हासिल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए राज्य परिवहन विभाग और पुलिस को डाटा हासिल करने को लेकर कोई पाबंदी नहीं है और बिना कोई कीमत चुकाए हासिल कर सकते हैं। वहीं डाटा हासिल करने के लिये बीमा कंपनियों के पास IRDA लाइसेंस होना चाहिये। कमर्शियल बैंक मालिक का नाम, पता, रजिस्ट्रेशन नंबर, फिटनेस और परमिट वगैरहा जैसी जानकारी ही हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा 50 रुपये प्रति रिकॉर्ड की दर से लाइसेंसधारी का नाम और पता, जारी करने वाली अथॉरिटी और उसकी वैलिडिटी के बारे में जानकारी मिल सकती है।   
 

अभी तक केवल एक ही आवेदन

वहीं वाहन निर्माता कंपनियां रजिस्टर्ड अथॉरिटी, इंजन नंबर, चैसिस नंबर, मॉडल का साल और निर्माता की नाम जैसी जानकारियां 100 रुपये प्रति रिकॉर्ड देकर हासिल कर सकते हैं। वहीं गाइडलाइन में स्पष्ट कहा गया है कि भारत में मौजूद किसी भी डाटा सेंटर या सर्वर पर इस डाटा को स्टोर नहीं किया जा सकता है और न ही भारत से बाहर किसी अन्य सर्वर पर ट्रांसफऱ या बेचा जा सकता है। वहीं इस वित्त वर्ष में डाटा हासिल करने को लेकर अभी तक केवल एक ही आवेदन मिला है।                
 

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