जीएसटी की वजह से इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य खतरे में
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एक जुलाई, 2017 से लागू होने वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) सिस्टम में इलेक्ट्रिक वाहनों को 12 फीसदी के टैक्स बैंड में रखा गया है। इस कदम का विरोध करते हुए आयुष लोहिया, सीईओ, लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज ने कहा कि ‘‘इलेक्ट्रिक वाहनों को 12 फीसदी के टैक्स बैंड में रखना इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए घातक साबित होगा। क्योंकि उत्तराखंड सहित कई राज्यों में इन वाहनों पर पहले ही 0 फीसदी वैट है, ऐसे में वहां पर भी 12 फीसदी टैक्स लागू होने से ग्राहकों पर कर का भार बढ़ जाएगा और इन वाहनों की बिक्री प्रभावित होगी क्योंकि कीमत 12 फीसदी बढ़ जाएगी। इससे वाहनों की लागत भी बढ़ जाएगी।"
कर मुक्त होना चाहिए ईवी उद्योग
आयुष कहते हैं कि नई कर प्रणाली के तहत, सरकार को नई कर प्रणाली में इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी की दर 0 से 5 फीसदी ही रखी जाए। इसके अलावा आने वाले समय में सरकार सब्सिडी आदि प्रदान कर ग्राहकों को बड़ी संख्या में इन वाहनों को खरीदने के लिए आगे आएं। इसके साथ ही जीएसटी लागू होने से ग्राहकों को कई प्रकार के लाभ भी होंगे। अगर ईवी पर जीएसटी को कम रखा जाता है तो सरकार को ईवी उद्योग से कर आय भी बढ़ेगी क्योंकि इससे बिक्री भी बढ़ेगी और उत्पादन भी बढ़ेगा। पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को लगातार सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि ग्रीन हाउस गैसों का निकास कम किया जाए और कार्बन का निकास भी कम हो। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों पर करों को कम करना समय की मांग है और नई प्रस्तावित दरें हमारी उम्मीदों के विपरीत हैं।
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