फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Automobiles News ›   Auto News ›   ELECTRIC VEHICLE INDUSTRY RESENTS 12 PERCENT GST

जीएसटी की वजह से इलेक्ट्रिक वाहनों का भविष्य खतरे में

Thu, 25 May 2017 03:46 PM IST
Updated Thu, 25 May 2017 03:46 PM IST
विज्ञापन
ELECTRIC VEHICLE INDUSTRY RESENTS 12 PERCENT GST

एक जुलाई, 2017 से लागू होने वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी)  सिस्टम में इलेक्ट्रिक वाहनों को 12 फीसदी के टैक्स बैंड में रखा गया है। इस कदम का विरोध करते हुए आयुष लोहिया, सीईओ, लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज ने कहा कि ‘‘इलेक्ट्रिक वाहनों को 12 फीसदी के टैक्स बैंड में रखना इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए घातक साबित होगा। क्योंकि उत्तराखंड सहित कई राज्यों में इन वाहनों पर पहले ही 0 फीसदी वैट है, ऐसे में वहां पर भी 12 फीसदी टैक्स लागू होने से ग्राहकों पर कर का भार बढ़ जाएगा और इन वाहनों की बिक्री प्रभावित होगी क्योंकि कीमत 12 फीसदी बढ़ जाएगी। इससे वाहनों की लागत भी बढ़ जाएगी।" 

विज्ञापन




 

कर मुक्त होना चाहिए ईवी उद्योग

ELECTRIC VEHICLE INDUSTRY RESENTS 12 PERCENT GST
पहले तीन चार साल के लिए सरकार को ईवी उद्योग को जीएसटी में राहत देनी चाहिए। बल्कि सरकार को इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाने के लिए करों से पूरी तरह से मुक्त कर देना चाहिए। इससे ग्राहकों को इन वाहनों का अनुभव करने का मौका मिलेगा और ग्राहकों का आधार बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। 

आयुष कहते हैं कि नई कर प्रणाली के तहत, सरकार को नई कर प्रणाली में इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी की दर 0 से 5 फीसदी ही रखी जाए। इसके अलावा आने वाले समय में सरकार सब्सिडी आदि प्रदान कर ग्राहकों को बड़ी संख्या में इन वाहनों को खरीदने के लिए आगे आएं। इसके साथ ही जीएसटी लागू होने से ग्राहकों को कई प्रकार के लाभ भी होंगे। अगर ईवी पर जीएसटी को कम रखा जाता है तो सरकार को ईवी उद्योग से कर आय भी बढ़ेगी क्योंकि इससे बिक्री भी बढ़ेगी और उत्पादन भी बढ़ेगा। पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को लगातार सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि ग्रीन हाउस गैसों का निकास कम किया जाए और कार्बन का निकास भी कम हो। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों पर करों को कम करना समय की मांग है और नई प्रस्तावित दरें हमारी उम्मीदों के विपरीत हैं।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

पेट्रोल डीजल बंद होने से 60 अरब डॉलर बचेंगे

ELECTRIC VEHICLE INDUSTRY RESENTS 12 PERCENT GST
नीति आयोग द्वारा जारी एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता बढ़ने से देश में 2030 तक डीजल और पेट्रोल की लागत के रूप में 60 अरब डॉलर बचाए जा सकेंगे। वहीं इसके अलावा इससे 2030 तक एक गीगाटन (एक अरब टन) कार्बन उत्सर्जन से बचा जा सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के समक्ष निजी वाहनों की बढ़ती संख्या चुनौती होगी। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि मोटे तौर पर भारत यात्रियों की आवाजाही से संबंधी ऊर्जा मांग में 64 प्रतिशत की बचत कर सकेगा। वहीं इससे कार्बन उत्सर्जन में 37 प्रतिशत की कमी लाई जा सकेगी।  नीति आयोग और रॉक माउंटेन इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट इंडिया लीप्स अहेड: ट्रांसफॉर्मेटिव मोबिलिटी सॉल्यूशन में कहा गया है कि इससे सालाना 15.6 करोड़ टन डीजल और पेट्रोल के बराबर ईंधन की बचत की जा सकेगी। रिपोर्ट कहती है कि कच्चे तेल के मौजूदा मूल्य के हिसाब से देखा जाए तो इससे 2030 तक करीब 3.9 लाख करोड़ रुपए का ईंधन बचाया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार बैटरी की लागत प्रत्येक पांच साल में आधी हो रही है। इससे अगले चार से पांच साल में बैटरी के साथ इलेक्ट्रिक वाहन भी पेट्रोल या डीजल वाहन से बहुत अधिक महंगे नहीं होंगे। वहीं पेट्रोल वाहनों की तुलना में इनकी परिचालन लागत मात्र 20 प्रतिशत बैठेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें ऑटोमोबाइल समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। ऑटोमोबाइल जगत की अन्य खबरें जैसे लेटेस्ट कार न्यूज़, लेटेस्ट बाइक न्यूज़, सभी कार रिव्यू और बाइक रिव्यू आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed