2020 में होने वाले ऑटो एक्सपो को लगी मंदी की नजर, छाई रह सकती है ‘वीरानी’
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ऑटो सेक्टर में छाई मंदी का असर भविष्य में होने वाले खास इवेंट्स पर पड़ सकता है। अगले साल फरवरी में ऑटो एक्सपो होना है, जो हर दो साल में आयोजित किया जाता है। लेकिन इस बार का ऑटो एक्सपो फीका साबित होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में देश-विदेश की कंपनियां हिस्सा लेती हैं। वहीं इस बार कई कंपनियों ने हाथ खींच लिए हैं।
2018 में 30 से ज्यादा कंपनियां शामिल नहीं
फरवरी 2018 में हुए ऑटो एक्सपो में भी कुछ ऐसा ही दिखने को मिला था। उस दौरान भी तकरीबन 30 से ज्यादा कंपनियों ने हिस्सा नहीं लिया था। जिनमें निसान, जैगुआर, लेंड रोवर, अशोक लैलेंड, फिएट, जीप, रॉयल एनफील्ड, हार्ले डेविडसन, बजाज ऑटो और स्कोडा जैसी बड़ी कंपनियां शामिल थीं। इसके अलावा फॉक्सवैगन ग्रुप की कंपनियां ऑडी, डुकाती, मैनस्कैनिया, पोर्चे और लेंबोर्गिनी ने भी इससे दूरी बना कर रखी थी।
2020 में कई कंपनियां नहीं ले रही हिस्सा
वहीं कुछ ऐसा ही हाल फरवरी, 2020 में होने वाले ऑटो एक्सपो में होने जा रहा है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार भी कई कंपनियां इसमें शामिल होने में हिचक रही हैं। इन कंपनियों में होंडा कार्स, हीरो मोटरकॉर्प, अशोक लेलैंड और बीएमडब्ल्यू शामिल हैं। माना जा रहा है कि ऑटो सेक्टर में छाई मंदी को देखते हुए कंपनियां ये कदम उठा रही हैं। वहीं कंपनियों का कहना है कि कई मॉडल्स को पहले ही लॉन्च किया जा चुका है या फिर उनकी डिटेल्स ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
चीनी कंपनियों की दिलचस्पी
वहीं नई कंपनियों में किआ मोटर्स और एमजी हेक्टर इस बार के ऑटो एक्सपो में हिस्सा लेंगी। खास बात यह होगी कि 2018 के ऑटो एक्सपो में जो कंपनियां शामिल नहीं हुई थीं, इस बार उनमें से कुछ हिस्सा ले रही हैं। जिनमें फॉक्सवैगन, स्कोडा, चीन की बड़ी एसयूवी और पिकअप ट्रक्स निर्माता कंपनी ग्रेट वॉल मोटर्स शामिल हैं। इन कंपनियों ने 3,500 स्क्वायर फुट की जगह ली है। वहीं मारुति सुजुकी ने भी तकरीबन इतनी ही जगह खुद के लिए ली है। इसके अलाला ह्यूंदै मोटर्स भी इसमें हिस्सा ले रही है। वहीं फिएट क्रिस्लर और फोर्ड इस बार शामिल नहीं हो रही हैं।
कोई खास लॉन्च नहीं
साथ ही, निसान का कहना है कि अभी उसने शामिल होने या नहीं होने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। वहीं लग्जरी कार सेगमेंट में अभी तक मर्सिडीज बेंज और लेक्सस के शामिल होने की ही खबरें हैं। इस बार के ऑटो एक्सपो में दर्शकों को थोड़ी मायूसी भी हो सकती है। क्योंकि इस बार कोई खास लॉन्च भी नहीं हो जा रहे हैं। वहीं स्पेस भी खाली रहेगा। बीएस-6 उत्सर्जन मानकों का असर ऑटो एक्सपो पर भी दिखाई देगा। कंपनियों का यह भी कहना कि केवल फ्यूचर कॉन्सेप्ट मॉडल्स को शोकेस करना फायदे का सौदा नहीं होता। वहीं ज्यादातर कंपनियां ऑटो एक्सपो से पहले ही अपने प्रोडक्ट लाइन अप का ऐलान कर देती हैं।
ट्रक बनाने वाली कंपनियां भी गायब
वहीं देश की टॉप-5 ऑटो कंपनियां हीरो, बजाज ऑटो, टीवीएस मोटर्स और रॉयल एनफील्ड भी इस बार के ऑटो एक्सपो से गायब रहेंगे। वहीं यामाहा भी हिस्सा नहीं लेगा, लेकिन होडा मोटरसाइकिल ऑटो एक्सपो में शामिल हो सकती है। इसके अलावा ट्रक निर्माता कंपनियों में टाटा मोटर्स और महिंद्रा को छोड़ कर अशोक लेलैंड, आइशर, भारत बेंज में अभी तक ऑटो एक्सपो में शामिल होने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है।
सियाम कर रहा है बात
ईटी की खबरों के मुताबिक अक्टूबर में ही ऑटो एक्सपो की 90 फीसदी से ज्यादा जगह बुक हो चुकी है। हालांकि सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स यानी सियाम अभी भी कई कंपनियों से ऑटो एक्सपो में हिस्सेदारी को लेकर बात कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि ऑटो एक्सपो में शामिल होने का फैसला एक दिन में नहीं होता, बल्कि इसके लिए पहले से ही तैयारियां करनी पड़ती हैं। वहीं मैनपावर के साथ पैसे की भी व्यवस्था करनी पड़ती है।
नहीं निकलता खर्च
2018 के ऑटो एक्सपो के आंकड़ों के मुताबिक औसतन करीब सात प्रोडक्ट्स को शोकेस करने के लिए मीडियम साइज स्टाल की जरूरत पड़ती है। इसका औसतन खर्च 10 करोड़ रुपये पड़ता है। जबकि लेबर, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंपोर्ट, प्रमोशन, आउटडोर डिस्प्ले को मिला कर यह खर्च 30 करोड़ से भी ऊपर पहुंच जाता है। कंपनियों की यह भी शिकायत होती है कि उनका खर्च उन्हें वापस नहीं निकल पाता है।