आरटीओ ने उड़ाई ऑटो डीलर्स की नींद, गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में डाल रहे हैं अड़ंगा!
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मार्च से लॉकडाउन के चलते घाटे से जूझ रही है ऑटो कंपनियों को नई-नई समस्याओं से दोचार होना पड़ रहा है। ऑटो कंपनियों स्थानीय परिवहन अधिकारियों (आरटीओ) के रवैये से परेशान हैं। ऑटो कंपनियों का कहना है कि कई राज्यों में आरटीओ नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं कर रहे हैं।
BS4 वाहनों का स्टॉक
ऑटो कंपनियों का कहना है कि डीलर्स के पास पहले से ही स्टॉक में बीए4 मानक वाले कमर्शियल व्हीकल्स और दोपहिया वाहन खड़े हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन वे नहीं करवा पा रहे हैं, वहीं अब वे बीएस6 वाहनों का रजिस्ट्रेशन न होने से परेशान हैं। ऑटोमोबाइल डीलर्स की संस्था फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशऩ यानी फाडा के वाइस प्रेसिडेंट विंकेश गुलाटी का कहना है कि कई आरटीओ बेहद धीमी गति से काम कर रहे हैं।फाडा के मुताबिक सरकार के कॉन्टैक्टलेस रजिस्ट्रेशन के आदेश के बाद भी कई आरटीओ की अप्रैल के बाद से नए वाहनों को रजिस्टर ककरने की रफ्तार बेहद धीमी है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और पश्चिमी बंगाल के रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसेज बेहद मंद रफ्तार से चल रहे हैं।
डीलरों से लिखित में अडंरटेकिंग
एक डीलर का कहना है कि कुछ मामलों में दूसरे राज्य की रफ्तार बहुत तेज है। कॉन्टैक्टलेस रजिस्ट्रेशन करने में राजस्थान बहुत आगे हैं। उनका कहना है कि कई राज्यों में कॉन्टैक्टलेस रजिस्ट्रेशन केवल कमर्शियल वाहनों की बजाय केवल निजी वाहनों तक ही सीमित है।वह कहते हैं कि आरटीओ डीलरों से लिखित में अडंरटेकिंग मांग रहे हैं। कहते हैं कि आरटीओ में वाहनों का फिजिकल रूप निरीक्षण किया जाना आवश्यक है, या फिर वे चाहते हैं कि डीलर के आउटलेट पर उनका निरीक्षण किया जाए। यहां तक आरटीओ की तरफ से यह भी धमकी दी गई है कि जब तक निरीक्षण न हो जाए, तब तक ग्रहाकों को कारें डिलीवर न की जाएं।
संक्रमण फैलने की संभावनाएं कम
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट, सेल्स नवीन सोनी ने ईटी को बताया कि कॉन्टैक्टलेस ट्रांसमिशन का ग्राहकों और इस क्षेत्र से जुड़े लोगों ने स्वागत किया था, क्योंकि इससे संक्रमण फैलने की संभावनाएं बिलकुल नगण्य थीं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्यों ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने के लिए डिजिटल सिस्टम के जरिए वाहनों को ऐसे संपर्क रहित पंजीकरण की सुविधा दे रहे हैं।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी बीएस4 वाहनों की बिक्री के लिए 1 अप्रैल की समय सीमा तय की थी। मार्च में कुछ राहत मिली जब शीर्ष अदालत ने देशव्यापी लॉकडाउन खत्म होने के बाद डीलरों को अपने बीएस4 स्टॉक का 10 फीसदी बेचने की अनुमति दी थी। लेकिन अब निर्माता कंपनियां और डीलर दोनों ही आरटीओ के रवैये से परेशान हैं।