नितिन गडकरी ने दिलाया भरोसा, पेट्रोल और डीजल वाहनों पर नहीं लगेगा बैन, जीएसटी दरों में कमी के संकेत

ऑटो डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 05 Sep 2019 03:36 PM IST
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Nitin Gadkari On Scooter
Nitin Gadkari On Scooter - फोटो : फाइल फोटो

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केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर भरोसा दिया है कि सरकार इंटरनल कंबशन वाले पेट्रोल और डीजल इंजनों पर बैन नहीं लगाने जा रही है। गडकरी का कहना है कि चार लाख करोड़ रुपये वाले देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर को ईंधन के स्वच्छ स्रोतों को अपनाने की तरफ बढ़ना चाहिए, क्योंकि प्रदूषण और सात लाख करोड़ रुपये का आयातित ईंधन सरकार पर दबाव बना रहा है।

जीएसटी की दरों में कमी करने के लिए सुझाव

ऑटोमोबाइल कंपनियों के सगंठन के सियाम के एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि वे भरोसा दिलाते हैं कि वे वित्त मंत्रालय को जीएसटी की दरों में कमी करने के लिए सुझाव देंगे। उन्होंनें बीएस-6 मानकों को लागू करने को लेकर ऑटो सेक्टर में छाई मंदी को चिंता जाहिर करते हुए कहा कि वे अपनी सिफारिशें वित्त मंत्री को देंगे।      

हाईब्रिड वाहनों पर जीएसटी घटाने पर विचार-विमर्श

उन्होंने आगे कहा कि मंत्रालय पहले से हाईब्रिड वाहनों पर जीएसटी घटाने को लेकर पहले ही विचार-विमर्श कर रहा है। सरकार पहले ही इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी की दरें घटा कर 12 फीसदी से पांच फीसदी तक कर चुकी है। साथ ही सरकार योजना बना रही है कि ऑटो लोन की ब्याज दरों में कटौती की जाए। आरबीआई ने बैंकों को सभी लोन रेपो रेट से जोड़ने के आदेश दिए हैं। जिसके बाद एक अक्टूबर से होमलोन, ऑटोलोन, पर्सनल लोन और सभी प्रकार को लोन को जोड़ने को कहा गया है। जिसके बाद माना जा रहा है कि ऑटोलोन की किश्तों में कमी आएगी।      

28 से घटा कर 18 फीसदी करने की मांग

इससे पहले बुधवार को ऑटोमोबाइल डीलरों की संस्था फाडा ने सरकार से मांग थी कि वाहनों पर से जीएसटी रेट में कटौती की जाए। संस्था का कहना है कि इससे मांग में बढ़ोतरी होगी। संस्था ने जीएसटी की दरें 28 फीसदी से घटा कर 18 फीसदी करने की मांग की है। मंदी से जूझ रहे ऑटो सेक्टर को जीएसटी रेट में कटौती से काफी उम्मीदें हैं। इससे पहले ऑटो कंपनियां भी दरों में कमी किए जाने की मांग कर चुकी हैं।

20 सितंबर को गोवा में बैठक

गौरतलब है कि अगली जीएसटी काउंसिल की बैठक आगामी 20 सितंबर को गोवा में होनी है। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार पर बढ़ते दबाव के बीच जीएसटी काउंसिल में अस्थाई तौर पर कुछ वक्त के लिए जीएसटी दरों में कटौती करने का फैसला लिया जा सकता है। सरकार की घबराहट इस बात को लेकर है कि अगर उन्होंने एक सेक्टर में जीएसटी की दरों में कटौती का एलान किया तो, मंदी की मार से जूझ रहे देश के बाकी सेक्टरों में भी दरों में कमी किए जाने की मांग कर सकते हैं।

कम हो सकता है ऑटो लोन

रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार एबीएफसी सेक्टर से लिक्विडिटी को बढ़ाने के लिए ऑटोमोबाइल लोन कम करने की दिशा में भी कदम उठाने की सोच रही है। सरकार की पहली प्राथमिकता मंदी की मार से खस्ताहाल ऑटोमोबाइल सेक्टर को राहत देने की है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ऑटोमोबाइल्स पर जीएसटी घटाना सरकार के लिए मुश्किल है, क्योंकि राज्य सरकारें गाड़ियों पर जीएसटी दरों में कटौती के खिलाफ हैं, क्योकि इस कटौती का असर उनकी आमदनी पर पड़ेगा। वहीं मंदी की मार से जूझ रहे बाकी सेक्टर भी ऐसी ही कटौती की मांग करेंगे।

ऑटो कंपोनेंट्स पर 18 फीसदी टैक्स!

अधिकारियों का कहना है कि भारतीय कार निर्माताओं और विदेश स्थित ऑटो कंपनियों को कलपुर्जे निर्यात करने वाली कंपनियों का कहना है कि उन्हें अलग-अलग 18 और 28 फीसदी की दर से टैक्स चुकाना पड़ रहा है, बजाय इसके सरका सभी प्रकार के ऑटो कंपोनेंट्स पर 18 फीसदी की टैक्स लगाने पर सहमति दे सकती है।
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