आखिर केंद्र सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को क्यों लगाई फटकार, चेतावनी के बाद भी कर रही हैं ये काम
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव गिरधर अरमाने कहा कि कुछ ही कार कंपनियों ने व्हीकल सेफ्टी रेटिंग सिस्टम अपनाया है और वे इन्हें केवल अपनी कारों के टॉप वैरियंट्स में ही इस्तेमाल कर रही हैं...
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केंद्र सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों के रवैये पर जबरदस्त नाराजगी जताई है। सरकरा ने उन रिपोर्ट्स पर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि देश में वाहन निर्माता कंपनियां जानबूझ कर दोयम दर्जे के सुरक्षा उपकरणों के साथ वाहनों को बेच रही हैं। साथ ही सरकार ने चेतावनी देते हुए कंपनियों से कहा है कि ये कृत्य माफी लायक नहीं है और इसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की संस्था सियाम की तरफ से जारी एक सेमीनार में बोलते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव गिरधर अरमाने कहा कि कुछ ही कार कंपनियों ने व्हीकल सेफ्टी रेटिंग सिस्टम अपनाया है और वे इन्हें केवल अपनी कारों के टॉप वैरियंट्स में ही इस्तेमाल कर रही हैं। सियाम ने सड़क पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए वाहन में लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइसेज लगाने को लेकर एक सेमीनार का आयोजन किया था।
टॉप वैरियंट्स में ही सेफ्टी रेटिंग्स
सेमीनार मे बोलते हुए गिरधर अरमाने ने कहा कि उन्हें ऐसी खबरों से बेहदग दुख पहुंचा है कि भारत में ऑटोमोबाइल कंपनियां जानबूझ कर निचले स्तर के सुरक्षा मानक अपना रही हैं और उन्हें इस प्रैक्टिस को तुरंत रोकना होगा। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा में वाहन निर्माताओं को अहम योगदान है और कंपनियों को भारत में बेहतरीन क्वॉलिटी के वाहन देने में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए, लेकिन कुछ कंपनियां भारत में इसे ताक पर रख रही हैं।
अरमाने ने कहा कि ऑटोमोबाइल कंपनियों को इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। वहीं ऐसी कारों को तुरंत बेचना बंद किया जाना चाहिए, जिनमें सुरक्षा के पूर्ण इंतजाम नहीं हैं। उन्होंने आगे कहा कि वे इस बात से बेहद दुखी हैं कि कुछ ही कंपनियों ने सेफ्टी रेटिंग्स सिस्टम को लागू किया है और कुछ निर्माता अपने टॉप वैरियंट्स में ही इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।
वाहनों में सेफ्टी रेटिंग देना जरूरी
उन्होंने आगे कहा कि ये सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए अपने वाहनों में सेफ्टी रेटिंग देना जरूरी है, ताकि ग्राहक को यह भरोसा रहे कि वे क्या खरीद रहे हैं और इसके प्रभाव क्या होंगे। उन्होंने अमेरिका और भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि 2018 में अमेरिका में 45 लाख सड़क हादसों में 36560 लोगों की मौत हो गई थी, वहीं भारत में 4.5 लाख दुर्घटनाओं में 1.5 लाख लोग मारे गए। और ये तब हुए जब हमारे यहां धीमी सड़कें और धीमी गति से चलने वाले वाहन हैं।
उन्होंने थ्री पाइंट सीट बेल्ट को इजाद करने वाले स्वीडिश इंजीनियर निल्स बोहलिन का उदाहरण देते हुए ऑटो कंपनियों से पूछा कि वे बताएं कि सुरक्षा को लेकर उनके पास कितने पेटेंट्स हैं। उन्होंने कहा कि सीट बेल्ट इतनी जल्दी क्यों लागू हो गई क्योंकि वॉल्वो ने इस पेटेंट को शेयर किया और बोहलिन ने इस पेटेंट को सभी पार्ट्स निर्माताओं के साथ उनके डिजाइन में इस्तेमाल के लिए भी साझा कर दिया।
उन्होंने कहा कि कंपनियों को थ्री-प्वाइंट सीट बेल्ट को भी अपनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कुछ सक्रिय सुरक्षा प्रणालियां, जो दुर्घटना की स्थिति में प्रतिक्रिया करती हैं जैसे एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम और सीट बेल्ट को भारत में लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ कमी है और भारत को ये सभी सिस्टम सभी गाड़ियों के पूरी तरह से लागू करने की आवश्यकता है, न कि केवल टॉप मॉडल्स के लिए।
दुर्घटना पीड़ितों का कैशलेस उपचार
अरमाने ने सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सरकार की तरफ से उठाए गए उपायों पर टिप्पणी करते हुए कि केंद्र सरकार दुर्घटना पीड़ितों की आपातकालीन देखभाल कैशलेस उपचार की एक योजना को अधिसूचित करने की प्रक्रिया में है और व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग (वीएलटी) इसका अहम हिस्सा होगा। उन्होंने कहा कि वीएलटी व सीसीटीवी कैमरे का इस्तेमाल बीमा कंपनियों के द्वारा भी किया जाने लगा है।
इस संबंध में उन्होंने मौजूदा दौर में सीट बेल्ट व एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम का भी जिक्र किया। सुरक्षा के दृष्टिकोण से व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग (वीएलटी) प्रणाली को भी उन्होंने एक अहम कदम बताया। वीएलटी व सीसीटीवी कैमरे का इस्तेमाल बीमा कंपनियों के द्वारा भी किया जाने लगा है। इसके अलावा जीपीएस प्रणाली की शुरुआत को एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए अरमाने ने कहा कि इससे सुरक्षा मिलने के साथ-साथ टोल कलेक्शन का काम भी आसान हो जाएगा। वहीं सरकार जीपीएस सिस्टम को सभी वाहनों में लगाने की बात कर रही है।