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ओला, उबर का स्टिकर देखकर बैठना हो सकता है खतरनाक!

Fri, 28 Dec 2018 05:10 PM IST
भावना चौधरी आॅटो डेस्क, अमर उजाला
आॅटो डेस्क, अमर उजाला Published by: भावना चौधरी Updated Fri, 28 Dec 2018 05:10 PM IST
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Cabs are always not to promise convenience and security,Here are the reason
TAXI

आप ओला, उबर या किसी प्रचलित ब्रांड की कैब इसलिए लेते हैं क्योंकि इनमें सुविधा और सुरक्षा का वादा मिलता है, लेकिन ये वादा हमेशा पूरा हो ये जरूरी नहीं है। एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें पाँच लोगों का एक गैंग ओला कैब का इस्तेमाल कर लोगों को लूटता था। पुलिस के अनुसार लूट के ऐसे 200 मामलों में इस गैंग का हाथ था।

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इस गैंग का भंडाफोड़ (22 दिसंबर) रात को हुआ जब नोएडा सेक्टर-39 की पुलिस ने एक कार में सवार चार लोगों को संदेह में गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक ये लोग बड़े शातिर तरीके से लूटपाट करते थे और करीब एक साल से वारदातों को अंजाम दे रहे थे। ये गैंग ओला की तीन गाड़ियां चलाता था।
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ये लोग अलग-अलग रूट से सवारियाँ लेते थे और उन्हें सुनसान जगह पर लूट लेते थे।

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कैसे करते थे वारदात
वैसे तो ओला कैब बुक करते वक़्त उसमें ड्राइवर की जानकारी दर्ज होती है और रूट ट्रैक होता है। मगर ये गैंग बिना बुक की गई टैक्सी में वारदात करते थे। इसके लिए वो अधिकतर रात का समय चुनते थे। कई बार लोग ऑफिस से देर रात निकलते हुए या कहीं से लौटते वक्त रास्ते में दिखी कैब में बैठ जाते हैं, ख़ास तौर पर जब उसपर किसी बड़े ब्रांड का स्टिकर लगा हो।

ये गैंग लोगों के इसी भरोसे का फायदा उठाता था। पुलिस ने बताया कि इन पाँच लोगों में से कोई एक कैब चलाता था और दो से तीन लोग उसमें पहले से ही सवार होते थे, और रात को अकेले जाने वाली सवारियों को निशाना बनाते थे। वारदात से पहले ये लोग कैब को ओला एप से डिस्कनेक्ट कर लेते थे ताकि उन्हें ट्रैक न किया जा सका, फिर किसी सुनसान जगह पर पहुंचकर ये लूटपाट करके सवारी को गाड़ी से बाहर फेंक देते थे।

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टैक्सी

मैक्सी किलर गैंग

लोगों को विश्वसनीय ब्रांड की कैब में बैठाकर वारदात करने का ये अकेला मामला नहीं है। 12 साल पहले भी ऐसा ही एक गैंग पकड़ा गया था जो सवारी के साथ लूटपाट के बाद हत्या करके फेंक देता था।
इस मामले में 9 लोग पकड़े गये थे जिन्हें बाद में कोर्ट ने उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई।

ये गैंग गुड़गांव, दिल्ली और आसपास के इलाकों में सक्रिय था। इन्होंने 25 से ज्यादा लोगों की हत्या की थी और खौफ इतना था कि लोग इन्हें 'मैक्सी किलर' कहकर बुलाने लगे थे। गुड़गांव में एक युवक के अचानक गायब होने के बाद पुलिस ने मैक्सी कैब चालकों पर नजर रखी और इस तरह अपराधी हाथ में आए।

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