ऑटो सेक्टर की सहायक कंपनियों से 6,000 कर्मचारियों की छंटनी, 45 फीसदी उत्पादन घटा
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ऑटो सेक्टर में मंदी का असर बाकी राज्यों में मौजूद इस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों पर भी पड़ रहा है। महाराष्ट्र के नासिक जिले में ऑटो सेक्टर से जुड़ी 650 कंपनियां मौजूद हैं। उद्योग जगत से जुड़े संगठनों की मानें तो वहां 45 फीसदी से ज्यादा उत्पादन घट गया है, इन यूनिटों से जुड़े तकरीबन 6,000 अनुबंधित कर्मचारी अपनी नौकरियां खो चुके हैं।
मात्र पांच दिन ही काम
ईटी की खबरों के मुताबिक ये यूनिट्स हफ्ते में मात्र पांच दिन ही काम कर रही हैं और रोजाना शिफ्टों में भी कटौती की गई है। पहले यहां पर तीन शिफ्ट होती थीं, वहीं अब केवल दो ही रह गई हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि मांग में कमी आने के चलते उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
महिंद्रा एंड महिंद्रा और बॉश को पार्ट्स सप्लाई
ये यूनिट्स महिंद्रा एंड महिंद्रा और बॉश को पार्ट्स सप्लाई करती हैं। नासिक में मौजूद 650 कंपनियों में से 450 बड़े वेंडर हैं, जबकि 200 यूनिट्स सब-वेंडर हैं। ये यूनिट्स सतपुर, अंबड और सिन्नार इंडस्ट्रियल एरिया में हैं। नासिक इंडस्ट्रीज एंड मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के चेयरमैन मनीश रावल का कहना है कि बड़ी ईकाईयों ने मांग न होने के चलते अपने उत्पादन में कटौती की है।
बीएस-6 मानक हैं वजह
अंबड इंडस्ट्रियल एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वरुण तलवार का कहना है कि अगले साल से बीएस-6 मानक लागू होने वाले हैं और फिलहाल बीएस-4 मानक मौजूद हैं। सरकार ने बीएस-5 मानकों की बजाए एक कदम आगे बीएस-6 तक पहुंचने का फैसला किया है और वाहनों की मांग में कमी के पीछे सबसे बड़ी वजह यही है।
गणेश चुतर्थी पर मांग नहीं
उन्होंने बताया कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल वाहनों की कीमतों में डेढ़ लाख रुपये का अंतर है, वहीं नए उत्सर्जन मानक आने के बाद यह अंतर बढ़ कर साढ़े तीन लाख रुपये तक पहुंच जाएगा। यह वजह भी वाहनों की बिक्री पर भारी पड़ रही है। तलवार का कहना है कि हर साल गणेश चुतर्थी के आने से पहले मांग में बढ़ोतरी होती थी, लेकिन इस साल हालात बिल्कुल अलग हैं और मांग में कोई उछाल नहीं है।
महिंद्रा एंड महिंद्रा का उत्पादन 50 फीसदी घटा
महिंद्रा एंड महिंद्रा वाहनों की मांग में कमी होने के चलते अपनी कई यूनिट्स में पहले ही जुलाई से लेकर सितंबर तक की तिमाही में 8 से 12 दिन का नो-प्रोडक्शन डेज का एलान कर चुकी है। इस महीने भी महिंद्रा एंड महिंद्रा का नासिक प्लांट चार दिन तक बंद रहा था, वहीं बॉश ने 26 अगस्त से 31 अगस्त तक उत्पादन बंद कर दिया है। महिंद्रा एंड महिंद्रा नासिक प्लांट में एमयूवी का निर्माण करती है और कंपनी ने उत्पादन 50 फीसदी तक घटा दिया है। बॉश नासिक प्लांट में कॉमन रेल डीजल इंजेक्टर्स (CRDIs) बनाती है।
275 यूनिट प्रतिदिन उत्पादन
महिंद्रा एंड महिंद्रा के नासिक प्लांट में पहले 540 गाड़ियां रोजाना बनती थीं, जिनमें स्कार्पियो, वेरिटो, मराजो, एक्सयूवी और जाइलो शामिल हैं। लेकिन अब उत्पादन घटकर 275 यूनिट प्रतिदिन ही रह गया है। इससे पहले मारुति की मंगलवार को हुई सालाना आम बैठक में कंपनी के चेयरमैन आर सी भार्गव के तीन हजार से ज्यादा अस्थाई कर्मचारियों की छंटनी के खुलासे के बाद पूरे ऑटो सेक्टर में भूचाल ला दिया था।