#Ashwinsundar चला रहे हों हाईटेक कार तो रखें इन बातों का ख्याल
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चेन्नई के संथोम हाई रोड पर शनिवार को हुए सड़क हादसे में प्रोफेशनल रेसर अश्विन सुंदर और उनकी पत्नी की मौत हो गई। हादसा में अश्विन की बीएमडब्ल्यू कार पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कार पेड़ और दिवार के बीच फंस गई। पुलिस के मुताबिक कार के फंस जाने के कारण अश्विन और उनकी पत्नी कार से बाहर नहीं निकल पाएं। जिस वजह से उनकी मौत हो गई। इसका सीधा मतलब यह है कि आपकी कार कितनी भी सुरक्षित क्यों न हो, अगर आप कार ड्राइविंग में लापरवाही करेंगे तो इसका हरजाना आपको भरना होगा।
भारत की सड़कों पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती है। इसके लिए कभी सड़के तो कभी खुद ड्राइवर जिम्मेदार होता है। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे के मुताबिक 2015 में हुई दुर्घटनाओं में लगभग 77.1 फीसदी मामलों में गलती ड्राइवर की पाई गई। आइए आपको बताते हैं किस वजह से ये हादसे होते हैं और इन हादसों को कैसे टाला जा सकता है।
क्यों होते हैं छोटी सड़कों पर ये हादसे
चेन्नई में हुए हादसे की बात करें तो हादसे में मरने वाला शख्स एक प्रोफेशनल रेसर था। इसका सीधा मतलब है कि ओवर कांफीडेंस में कार चलाना भी आपको महंगा पड़ सकता है। कार जिस हालत में सड़क पर मिली उससे कार की रफ्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है। जब कभी आप छोटी सड़कों पर निकल रहे हो तो आपकी स्पीड 40 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए क्योंकि आप हाईवे पर नहीं हो। हाईवे पर भी कार की रफ्तार उतनी ही रखें जितनी स्पीड आप संभाल सकते हैं।
ये भी हो सकते हैं, हादसे के कारण
जब चला रहे हों हाई एंड कारें
जब कभी आप ज्यादा शक्ति वाली कार ड्राइव कर रहे हों तो ध्यान रखें कि आप की गति ज्यादा होगी इसलिए आप अपनी नजरें एकदम सामने टिकाकर रखें। क्योंकि हाई एंड कारों की खासियत ये होती है कि 100 व 120 की गति पर भी पता नहीं चलने देतीं कि आपकी स्पीड ज्यादा है। ऐसी दुर्घटनाओं में गलती गाड़ी की नहीं उस इंसान की होती है जो उसे ड्राइव कर रहा होता है। तेज ब्रेकिंग से न डरें और आवश्यकता होने पर गाड़ी को ब्रेक करें आपकी गाड़ी कुछ दूर लेकर रुक जाएगी क्योंकि उसमें वो फीचर दिए गए हैं जिससे आप सुरक्षित रह सकें और लोगों को सुरक्षित रख सकें।
लाइसेंस बनवाने के नियम बनें सख्त
अभी भी देश के अधिकतर लाइसेंस जारी करने वाले दफतर में लोग जुगाड़ से अपना काम करवा लेते हैं। अगर किसी को गाड़ी चलाना नहीं आता और इसके पास लाइसेंस है इसका मतलब है कि वह गाड़ी लाइसेंस बनवाने के बाद सीख रहा है। ऐसे में न तो उसे गाड़ी चलाने का तकनीकि ज्ञान हो पाता है और न ही यातायात के नियमों के प्रति वह जागरूक बनता है। अगर सरकार लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरते और नियमों कड़ा किया जाए तो सड़क दुर्घटनाओं के वो मामले जो ड्राइवर के गलती से होते हैं उससे बचा जा सकता है।
नाबालिग से न करवाएं ड्राइव
बहुत से मां-बाप इस बात को देखकर खुश हो जाते हैं कि उनका बेटा या बेटी वयस्क होने से पहले ही ड्राइविंग कर रहे हैं। वयस्क होने के लिए 18 की उम्र इसलिए रखी गई है जिससे परिपक्वता के साथ कोई फैसला लिया जा सके। ऐसा करके न सिर्फ आप अपने बच्चों की जिंदगी बचा पाएंगे साथ ही सड़क पर चल रहे लोग भी सुरक्षित रहेंगे। भारत में हो रही कई कार दुर्घटनाओं में नाबालिगों का नाम सामने आया है।