अपने सुरों से दुनियाभर में लोगों को सुकून पहुंचाने वाले संगीतकार ए आर रहमान का आज जन्मदिन है। 6 जनवरी, 1967 में दक्षिण भारत में मद्रास के एक हिन्दू परिवार में जन्में एआर रहमान तमिल से लेकर हिंदी और हॉलीवुड तक अपनी प्रतिभा का सिक्का जमा चुके हैं। आज उनके जन्मदिन के मौके पर बताएंगे उनकी भावनाओं से जुड़ी राजदूत कार की कहानी।
A R Rahman की पहली कार मॉं ने दी थी उपहार, 32 सालों बाद भी है गुलजार
पहली कार हर किसी के लिए बेशकीमती होती है और जब मॉं का नाम आ जाता है तो भावुक होना बनता है। ऑस्कर और ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार एआर रहमान के लिए भी उनकी पहली कार विशेष है। अधिक इसलिए क्योंकि यह उनकी मां, करीमा ने उन्हें उपहार में दी थी। 80 के दशक में राजदूत कार सबसे अधिक बिकने वाली कारों में से एक थी। 49 वर्षीय गायक-संगीतकार ने फेसबुक पर कुछ समय पहले पुराने दिखने वाली सफेद राजदूत की तस्वीर साझा की, जो एक पेड़ के नीचे पार्क थी। उन्होंने इस कार की तस्वीर को साझा करते हुए उन्होंने लिखा "पहली कार जो मेरी माँ ने 1986 में मेरे लिए हासिल की थी,"
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यह कार 1958 से देश के बड़े राजनेताओं, उद्योगपतियों और सरकार की सबसे पसंदीदा गाड़ी रही। जो 2014 में अलविदा कह गई। लेकिन, अब इसका उत्पादन फिर से शुरू होने जा रहा है। मेक इन इंडिया के तहत बनने वाली देश की पहली कार अंबेसडर का उत्पादन कोलकाता में हिंदुस्तान मोटर कंपनी ने शुरू किया था। अपने आकार-प्रकार, बैठने की आरामदेह व्यवस्था और किसी भी सड़क पर चलने के माकूल होने की वजह से यह हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन गई थी।
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हिंदुस्तान मोटर कंपनी ने काले रंग की पहली अंबेसडर कार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट की थी और उसके बाद ही यह नई दिल्ली के लुटियन्स जोन में सत्ता राजनीति और नौकरशाही का अधिकृत वाहन बन गई थी। पंखे, पर्दे और लाल-नीली बत्तियों से सुसज्जित अंबेसडर में बैठना कुछ दशक पहले तक भी लोगों की महत्वाकांक्षाओं में शामिल था, तो इसलिए कि तब यह सरकारी अधिकारियों का इकलौता वाहन थी।