Budget 2026: भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को 'बूस्टर डोज' की आस, सस्ती कारों और ईवी सेक्टर पर फोकस की मांग
भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, जो देश की जीडीपी में करीब 7% योगदान देती है, अब केंद्रीय बजट 2026-27 से बड़ी राहत की उम्मीद कर रही है। उद्योग चाहता है कि सरकार ऐसे कदम उठाए जिससे हालिया रिकवरी बनी रहे और खासकर एंट्री-लेवल कारों व दोपहिया वाहनों की कमजोर मांग में तेजी आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में वाहन स्वामित्व अभी भी बहुत कम है, इसलिए मिडिल क्लास और मास-मार्केट सेगमेंट को सपोर्ट करना जरूरी माना जा रहा है।
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विस्तार
भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, जो देश की जीडीपी में करीब 7% योगदान देती है, अब केंद्रीय बजट 2026-27 से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठी है। 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। उद्योग चाहता है कि सरकार ऐसे कदम उठाए जिससे हाल ही में आई रिकवरी बनी रहे और गाड़ियों की मांग और तेज हो। हालांकि सितंबर 2025 के बाद GST सुधारों और त्योहारी सीजन की बिक्री से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन अभी भी कई समस्याएं बाकी हैं।
ऑटो सेक्टर में सुधार, पर सभी के लिए नहीं
ऑटो सेक्टर में सुधार बराबर नहीं हुआ है। महंगी और प्रीमियम गाड़ियों की बिक्री ठीक चल रही है। लेकिन एंट्री-लेवल कारें और दो-पहिया वाहन अभी भी कमजोर मांग से जूझ रहे हैं। नई सेफ्टी फीचर्स और नई तकनीक जुड़ने से गाड़ियों की कीमत बढ़ गई है, जिससे आम लोगों के लिए वाहन खरीदना मुश्किल हो गया है। कोटक सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अभी भी गाड़ियों की संख्या कम है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 1,000 लोगों पर सिर्फ 26 कारें (FY 2024-25) हैं। वहीं चीन में 1,000 लोगों पर 183 कारें और अमेरिका में लगभग 600 कारें हैं। इस अंतर को कम करने के लिए जरूरी है कि मिडिल क्लास और मास-मार्केट में गाड़ियों की मांग फिर से बढ़े।
ईवी और हाइब्रिड पर बजट से उम्मीदें
हाल ही में ईवी बिक्री में थोड़ी धीमी गति देखी गई है। इसलिए उद्योग चाहता है कि बजट में ईवी को बढ़ावा देने के लिए मजबूत फैसले हों।
1) बैटरी और जरूरी पार्ट्स पर टैक्स राहत
मोटोवोल्ट मोबिलिटी के तुषार चौधरी का कहना है कि ईवी खरीदने वालों (खासकर गिग वर्कर्स) के लिए आसान लोन और सब्सिडी वाली क्रेडिट स्कीम जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा कि बैटरी सामग्री, कंट्रोलर और मोटर जैसे जरूरी पार्ट्स (जो ईवी की लागत का 40-50% तक होते हैं) पर कस्टम ड्यूटी कम की जाए।
2) चार्जिंग पर जीएसटी कम हो
डेलॉइट इंडिया की शीना सरीन ने सुझाव दिया कि चार्जिंग सर्विस पर 18% जीएसटी घटाया जाए, ताकि ईवी चलाने का खर्च कम हो।
3) हाइब्रिड गाड़ियों पर साफ नीति
KPMG के वामन पारखी का कहना है कि हाइब्रिड वाहनों के लिए भी सरकार को साफ नियम बनाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि हाइब्रिड कारों को कम जीएसटी रेट या कस्टम ड्यूटी में फायदा मिलना चाहिए।
स्क्रैपेज पॉलिसी में बदलाव की जरूरत
पुरानी गाड़ियों को कबाड़ करने वाली व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी अभी उतनी सफल नहीं हो पाई है जितनी उम्मीद थी।
विशेषज्ञों के सुझाव
- स्क्रैप करने पर मिलने वाली रकम अभी एक्स-शोरूम कीमत का 4-6% होती है, इसे बढ़ाया जाए
- रोड टैक्स में ज्यादा छूट दी जाए
- स्क्रैपेज इंसेंटिव को जीएसटी रिबेट/क्रेडिट के रूप में दिया जाए, ताकि नई गाड़ी खरीदते समय उसका इस्तेमाल हो सके
उत्पादन और पीएलआई स्कीम में राहत की मांग
भारत ने FY 2025 में 3.1 करोड़ से ज्यादा वाहन बनाए, लेकिन ईवी और बैटरी से जुड़ी कई योजनाएं महंगे खर्च और नीति की स्पष्टता की कमी के कारण धीमी हो गई हैं। उद्योग चाहता है कि सरकार पीएलआई स्कीम के नियम आसान करे, ताकि छोटे और मझोले उद्योग भी इसमें शामिल हो सकें। इससे भारत में बैटरी निर्माण बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता घटेगी