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'उत्तरमुखी घर' भी देता है दुख, जानिए क्यों
राकेश/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 13 Jun 2013 12:16 PM IST
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आमतौर पर लोगों का यह मानना है कि उत्तर की ओर जिस मकान का मुख्य द्वार होता है उस घर में रहने वाले लोग सुखी होते हैं। इसलिए लोग उत्तर ही ओर मुख वाला घर एवं जमीन खरीदते हैं। लेकिन व्यवहारिकता में ऐसा देखने में आता है कि उत्तर की ओर मुंह वाले घर में रहने वाले लोग भी परेशान रहते हैं और इन्हें भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
दरअसल घर का मुख भले ही उत्तर में हो लेकिन इसमें वास्तु के नियमों का पालन नहीं किया जाए तो उत्तरमुखी घर में रहने वाले व्यक्ति भी कष्ट पाते हैं।
उत्तरमुखी घर में मुख्यद्वार पूर्व की बजाय पश्चिम दिशा की ओर अधिक बढ़ा हुआ हो तो घर के लोग अधिक समय तक घर में टिक नहीं पाते। ऐसे घर के घर के मुखिया को पैसा कमाने के लिए ज्यादातर समय घर से बाहर रहना पड़ता है।
बहुत से लोग उत्तर पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार के पास ही भूमिगत पानी की टंकी, और बोरिंग बनवा लेते हैं। इसे वास्तुदोष बढ़ जाता है और घर में चोरी की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे घर में रहने वाली महिलाएं अधिक चंचल रहती हैं और घर में कम टिकती हैं।
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कुछ लोग उत्तरमुखी जमीन में पश्चिम दिशा में अधिक खाली स्थान छोड़ देते हैं। ऐसे घर में रहने वाले पुरूषों को शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उत्तरमुखी घर में गंदे पानी की निकासी एवं सैप्टिक टैंक दक्षिण दिशा में रखना वास्तु के अनुकूल नहीं होता है इससे परिवार की स्त्रियों को कष्ट का सामना करना पड़ता है।
उत्तरमुखी घर को ऐसे बनाएं भाग्यशाली
कम्पाउंड वॉल और घर का मुख्यद्वार उत्तर पूर्व की ओर रखें। दक्षिण पूर्व में कुछ भाग खुला छोड़ दें।
उत्तर की तुलना में दक्षिण दिशा में और पूर्व की तुलना में पश्चिम दिशा में खुली जगह कम छोडे।
भूमिगत पानी के स्रोत उत्तर दिशा, ईशान कोण या पूर्व दिशा में ही रखें।
सैप्टिक टैंक मध्य पूर्व या मध्य उत्तर दिशा में बनवाएं।
घर के फर्श का एवं प्लॉट का ढाल उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें।
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दरअसल घर का मुख भले ही उत्तर में हो लेकिन इसमें वास्तु के नियमों का पालन नहीं किया जाए तो उत्तरमुखी घर में रहने वाले व्यक्ति भी कष्ट पाते हैं।
उत्तरमुखी घर में मुख्यद्वार पूर्व की बजाय पश्चिम दिशा की ओर अधिक बढ़ा हुआ हो तो घर के लोग अधिक समय तक घर में टिक नहीं पाते। ऐसे घर के घर के मुखिया को पैसा कमाने के लिए ज्यादातर समय घर से बाहर रहना पड़ता है।
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बहुत से लोग उत्तर पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार के पास ही भूमिगत पानी की टंकी, और बोरिंग बनवा लेते हैं। इसे वास्तुदोष बढ़ जाता है और घर में चोरी की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे घर में रहने वाली महिलाएं अधिक चंचल रहती हैं और घर में कम टिकती हैं।
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कुछ लोग उत्तरमुखी जमीन में पश्चिम दिशा में अधिक खाली स्थान छोड़ देते हैं। ऐसे घर में रहने वाले पुरूषों को शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उत्तरमुखी घर में गंदे पानी की निकासी एवं सैप्टिक टैंक दक्षिण दिशा में रखना वास्तु के अनुकूल नहीं होता है इससे परिवार की स्त्रियों को कष्ट का सामना करना पड़ता है।
उत्तरमुखी घर को ऐसे बनाएं भाग्यशाली
कम्पाउंड वॉल और घर का मुख्यद्वार उत्तर पूर्व की ओर रखें। दक्षिण पूर्व में कुछ भाग खुला छोड़ दें।
उत्तर की तुलना में दक्षिण दिशा में और पूर्व की तुलना में पश्चिम दिशा में खुली जगह कम छोडे।
भूमिगत पानी के स्रोत उत्तर दिशा, ईशान कोण या पूर्व दिशा में ही रखें।
सैप्टिक टैंक मध्य पूर्व या मध्य उत्तर दिशा में बनवाएं।
घर के फर्श का एवं प्लॉट का ढाल उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें।
वास्तुगुरू: कुलदीप सलूजा