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भुतहा गांव जहां शाम ढ़लने के बाद चलता है भूतों का राज

Sat, 03 May 2014 10:15 AM IST
Updated Sat, 03 May 2014 10:15 AM IST
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ghost village kuldhara

पिछले 200 वर्षों से उजाड़ आरै वीरान पड़ा भूतों का गांव कुलधारा जैसलमेर से 14 किलोमीटर दूर स्थित है जिसे लगभग सन् 1300 में कर्मकाण्डी पालीवाल ब्राह्मण समाज ने सरस्वती नदी के किनारे पर बसाया था। आज स्थिति यह है कि यहां शाम के बाद कोई इन्सान नहीं रुकता, क्योंकि स्थानीय लोगों के अनुसार यहां रात में भूतों का बसेरा रहता है।

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गांव के विरान होने की वजह है, एक हसीना

ghost village kuldhara

भूतों के गांव से यह इतना विख्यात हो चुका है कि राज्य सरकार ने इसे टूरिस्ट स्पॉट घोषित किया है। डिस्कवरी सहित दुनिया के कई टीवी चैनल्स ने कुलधरा की शूटिंग कर भूतों की कहानी अपने चैनल्स् पर चलाई है। गांव वालों के अनुसार कुलधरा एक शापित गांव है।

इतिहास के अनुसार जैसलमेर के भाटी राजपूत सामन्ती सरदार थे। लगभग 200 वर्ष पूर्व सन् 1825 में भाटी समाज के कमजोर राजा का एक सशक्त दीवान सालिम सिंह था।

सालिम सिंह कुलधरा के मुखिया की बेहद खूबसूरत बेटी के प्यार में पड़ गया और उससे शादी करना चाहता था। मुखिया द्वारा बेटी की शादी दीवान से ना करने पर दीवान ने बहुत भारी मात्रा में कर लगाने की धमकी गाँव वालों को दी।


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कहां गए मंदिर से भगवान

ghost village kuldhara

पालीवाल ब्राह्मण समाज के लोगों ने अपने मान-मर्यादा और आत्मसम्मान को महत्व देते हुए रक्षाबंधन के दिन गांव छोड़कर जाने का फैसला किया, जिसमें कुलधरा सहित खाबा, खाबिया, काठोडी, आबुर, कन्डियाला, आसवा, दामोदरा सहित आस-पास के 84 गांव के लोगों ने साथ देते हुए रातों रात गांव को खाली कर दिया और जैसलमेर के आस-पास की दूसरी रियासत में चले गए।

इसी कारण आज भी कुछ पालीवाल ब्राह्मण रक्षाबन्धन का त्यौहार नहीं मनाते हैं। इन 84 गांवों में से कुलधरा ही सबसे समृद्ध गाँव था, क्योंकि यहां के लोग रेगिस्तान में अच्छी फसल पैदा करने की तकनीक जानते थे।

आज भी कुलधरा में पालीवाल ब्राह्मणों के कुलदेवता बालाजी का बड़ा एवं सुन्दर मन्दिर है, लेकिन वर्तमान में मन्दिर के अन्दर किसी प्रकार की कोई मूर्ति नहीं है। कुलधरा की तरह बाकी गांवों में भी ऐसे छोड़े गए मकान आज भी उजाड़ और वीरान पड़े हुए हैं लेकिन विख्यात केवल कुलधरा गांव ही हुआ।

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क्या देखा वास्तुशास्त्री ने कुलधारा में

ghost village kuldhara

वास्तुगुरु कुलदीप सलूजा बताते हैं कि जैसलमेर भ्रमण के दौरान मैं कुलधरा के मध्य स्थित मन्दिर देखने गया। कुलधरा की भौगोलिक स्थिति का वास्तु विश्लेषण करने पर मुझे यह ज्ञात हुआ कि यहां 200 वर्ष पूर्व विवाद की स्थिति क्यों बनी। कुलधरा उजाड़ हो गया और फिर आबाद ही नहीं हो पाया और आज यह भूतों के गांव के नाम से प्रसिद्ध है क्यों है।

क्या वास्तुशास्त्री ने देखा भूत प्रेत?

ghost village kuldhara

वास्तुशास्त्र के अनुसार एसे स्थान जिनका नैऋत्य कोण नीचा हो, जहां नमी रहती हो पानी का जमाव रहता है काई जमी हो। नऋत्य कोण के दक्षिण या पश्चिम भाग में जमीन बढ़ाव हो जिस कारण यहाँ हवा का प्रवाह उचित नहीं हो एसे स्थान में नकारात्मक ऊर्जा बहुत बढ़ जाती है।

नैऋत्य कोण के वास्तु दोष के साथ यदि ईशान कोण में भी वास्तु दोष हो तो ऐसे स्थान में भूत प्रेत और अदृश्य शक्ति की मौजूदगी की अनुभूति होती है। कुलधारा में भी कुछ ऐसी ही वास्तु स्थिति है। इसी वास्तु दोष के कारण यहां भूत प्रेत के होने का अनुभव होता है। जबकि यहां ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया।

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