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'ऐसे घर में रहना खतरे से खाली नहीं'
राकेश/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 27 May 2013 08:20 AM IST
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घर में सबकुछ अच्छा चल रहा है लेकिन अचानक कुछ ऐसी घटना होती है जिससे घर की शुख-शांति चली जाती है। घर में अनजाने भय का एहसास होने लगता है और कोई अनहोनी घटना हो जाती है। इसका कारण भूत-प्रेत और जादू-टोना नहीं खुद घर होता है। घर में वास्तु दोष होने पर धन समृद्घि और मानसिक शांति ही प्रभावित नहीं होती है बल्कि वास्तु के अशुभ प्रभाव के कारण जीवन पर भी संकट के बादल मंडराने लगते हैं।
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यदि किसी के घर में केवल एक गंभीर वास्तुदोष है तो उस घर में किसी को गंभीर चोट लग सकती है लेकिन जीवन पर संकट नहीं आता है। जीवन पर संकट का एक बड़ा कारण नैऋत्य कोण यानी दक्षिण पश्चिम दिशा का दोषपूर्ण होना माना जाता है। नैऋत्य कोण में भूमिगत पानी की टंकी, कुआं, बोरवेल या किसी भी प्रकार से फर्श नीचा हो तब गंभीर वास्तुदोष बनता है।
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नैऋत्य कोण बढ़ा हुआ हो एवं घर के पश्चिम नैऋत्य कोण में मुख्य द्वार हो तब यह दोष घर के पुरूष सदस्य के लिए संकटकारी होता है। मुख्य द्वार दक्षिण नैऋत्य कोण में हो तब उस घर की स्त्री के जीवन पर संकट आता है।
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नैऋत्य के अलावा ईशान कोण का दोष भी संकटकारी होता है। वास्तु विज्ञान के अनुसार ईशान कोण कट जाए, घट जाए, गोल हो जाए, ऊंचा हो, ऊंचाई के साथ यहां टॉयलेट हो या कमरे अथवा शेड़ के कारण यह ढ़क गया हो तब यह दिशा दोषपूर्ण हो जाती है।
यदि किसी मकान के ईशान कोण की दीवार अंदर की ओर दब जाए जिसके कारण आग्नेय कोण की दीवार आगे बढ़ जाए या मकान का आग्नेय कोण नैऋत्य कोण से ऊंचा और ईशान कोण की तुलना में नीचा हो जाए तब ऐसे घर में वाद-विवाद एवं आपसी संघर्ष में किसी के जीवन पर संकट के बादल मंडराते हैं।
यदि मकान का उत्तर वाव्यय कोण नैऋत्य कोण से ऊंचा और ईशान कोण की तुलना में नीचा हो अथवा ढंक जाए तो घर की किसी महिला सदस्य विशेषतौर पर कन्या संतान के लिए अनिष्टकारी होता है। मकान का पश्चिम वायव्य ढंका हो तो पुरूष संतान के साथ अनहोनी घटना घटती है।
मकान का मुख्यद्वार दक्षिण में हो और प्लॉट की पूर्व दिशा की हद तक निर्माण किया गया हो, पश्चिम दिशा में खाली जगह हो और यहीं पर भूमिगत पानी का स्त्रोत हो, पूर्व-आग्नेय बढ़ा हुआ हो तो यह कष्टकारी होता है। इस प्रकार की बनावट वाले घर में पति-पत्नी के जीवन पर संकट आता है।
मकान के दक्षिण नैऋत्य या पश्चिम-नैऋत्य में खाली जमीन हो और घर का मुख्य द्वार उस ओर खुल रहा हो तथा यह भाग नीचा भी हो तब एक गंभीर वास्तु दोष बनता है। इसके साथ अगर आग्नेय कोण भी दोषपूर्ण हो तब किसी शत्रुता के कारण घर में अनहोनी घटना घटित होती है। अगर वायव्य कोण दोष पूर्ण हो तब प्रेम प्रसंग के कारण जीवन पर संकट आता है।
वास्तु गुरू 'कुलदीप सालूजा'