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जानिए क्या होते हैं पंचतत्व और सुख-समृद्धि के लिए इनका संतुलन क्यों हैं जरूरी ?
Tue, 09 May 2023 10:04 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 09 May 2023 10:04 AM IST
सार
हमारी भारतीय संस्कृति में अग्नि को सर्वाधिक महत्व दिया गया है यह अति पावन मानी जाती है और इसकी पूजा की जाती है। सूर्य तथा मंगल अग्नि प्रधान गृह होने से अग्नि तत्व के स्वामी माने गए हैं।
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vastu tips 2023: आकाश तत्व के अधिपति ग्रह गुरु व देवता ब्रह्मा हैं। आकाश में समस्त अस्तित्ववान तत्व समाए हुए हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आकाश, पृथ्वी, जल, वायु और अग्नि को पंच महाभूत कहा जाता है। हालांकि इन सबका स्वतंत्र अस्तित्व है,किन्तु जब इन्हें एकत्रित किया जाता है तो इनकी सामूहिक ऊर्जा का प्रभाव लाभप्रद होता है। किसी भी निवास स्थल पर पंच तत्वों की उपस्थिति अनिवार्य है। इनसे घर प्रकंपित होता है और सकारात्मक ऊर्जाएं प्रवाहित होती हैं। घर में रहने वालों पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
क्या करें
वास्तु का सुझाव है कि यह क्षेत्र खुला और खाली होना चाहिए ताकि अंतरिक्ष की लाभप्रद रश्मियां अबाध रूप से इमारत में प्रवेश कर सकें। यह क्षेत्र शांतिपाठ,आत्मनिरीक्षण,पूजन व योग के लिए सर्वोत्तम है। बौद्धिक विकास और बौद्धिक शांति के लिए आध्यात्मिक समृद्धि के लिए यह दिशा स्वस्थ रखनी चाहिए।
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क्या करें
मकान में वायु के प्रवेश की स्थिति उत्तर-पूर्व दिशा से होनी चाहिए। दरवाज़े,खिड़कियां,रोशनदान, कूलर,एसी.,बरामदा, बालकनी आदि हवा आने के सभी सम्बंधित साधन इसी दिशा में होने चाहिए।
क्या करें
त्रिकोणीय प्लॉट पर भवन का निर्माण नहीं करवाना चाहिए अन्यथा भयावह अग्नि दुर्घटनाओं से जान-माल की हानि की संभावना रहती है। इमारत के दक्षिण-पूर्व कोण(आग्नेय) पर अग्नि का आधिपत्य होता है,अतः यह कोण रसोई बनवाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
क्या करें
घर में जल का प्रतिनिधि हैंडपंप,जल भंडारण आदि व दर्पण अथवा पारदर्शी कांच करते हैं। घर में बाथरूम अथवा गेस्ट हाउस बनवाने के लिए उत्तर-पश्चिम कोण का चुनाव लाभप्रद है। मकान में जल की निकासी उत्तर-पूर्व में होनी चाहिए।
क्या करें
वास्तु विज्ञान का मत है कि घर के अंदर मनभावन और शांतिदायक वातावरण आवश्यक है। घर को गुलदस्तों, पौधों और अन्य प्राकृतिक तत्वों की मदद से संवारकर रखना चाहिए। घर में हवादार और हल्का-फुल्का वातावरण बनाने के लिए संतुलित प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। सजावटी वस्तुओं की आकृतियां वर्गाकार हों तो शुभ रहती हैं।
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आकाश
आकाश तत्व के अधिपति ग्रह गुरु व देवता ब्रह्मा हैं। आकाश में समस्त अस्तित्ववान तत्व समाए हुए हैं। अन्य चार तत्व भी आकाश पर ही निर्भर हैं और उसी में स्वतंत्रतापूर्वक विचरण करते हैं। आकाश ही व्यक्ति को सुनने की शक्ति प्रदान करता है। भवन का उत्तर-पूर्व कोणीय क्षेत्र आकाश तत्व से प्रशासित होता है।
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क्या करें
वास्तु का सुझाव है कि यह क्षेत्र खुला और खाली होना चाहिए ताकि अंतरिक्ष की लाभप्रद रश्मियां अबाध रूप से इमारत में प्रवेश कर सकें। यह क्षेत्र शांतिपाठ,आत्मनिरीक्षण,पूजन व योग के लिए सर्वोत्तम है। बौद्धिक विकास और बौद्धिक शांति के लिए आध्यात्मिक समृद्धि के लिए यह दिशा स्वस्थ रखनी चाहिए।
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वायु
वायु तत्व को वास्तुपुरुष का श्वास माना जाता है। वायु और अग्नि का एक दूसरे से गहरा सम्बन्ध होता है क्योंकि वायु से ही अग्नि प्रज्वलित होती है। दोनों तत्वों में ही रजस गुण की प्रधानता होती है और दोनों में ही स्थिरता पायी जाती है। मानव शरीर में दोनों ही तत्व स्पर्श का प्रतिनिधित्व करते हैं।क्या करें
मकान में वायु के प्रवेश की स्थिति उत्तर-पूर्व दिशा से होनी चाहिए। दरवाज़े,खिड़कियां,रोशनदान, कूलर,एसी.,बरामदा, बालकनी आदि हवा आने के सभी सम्बंधित साधन इसी दिशा में होने चाहिए।
अग्नि
हमारी भारतीय संस्कृति में अग्नि को सर्वाधिक महत्व दिया गया है यह अति पावन मानी जाती है और इसकी पूजा की जाती है। सूर्य तथा मंगल अग्नि प्रधान गृह होने से अग्नि तत्व के स्वामी माने गए हैं। वेदों में अग्नि को मानव जीवन के लिए अनिवार्य स्फुलिंग का प्रतिनिधित्व त्रिकोण करता है।क्या करें
त्रिकोणीय प्लॉट पर भवन का निर्माण नहीं करवाना चाहिए अन्यथा भयावह अग्नि दुर्घटनाओं से जान-माल की हानि की संभावना रहती है। इमारत के दक्षिण-पूर्व कोण(आग्नेय) पर अग्नि का आधिपत्य होता है,अतः यह कोण रसोई बनवाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
जल
जल का प्रतीक चक्र माना गया है। वास्तुशास्त्र गोलाकार प्लॉट खरीदने अथवा गोलाकार इमारतों का निर्माण करने की अनुमति नहीं देता। ऐसे स्थानों पर रहने वालों को सदैव बेचैनी व अस्थिरता की अनुभूति होती है । मानव शरीर में मौजूद जल का प्रतिनिधि स्वाद है,अतः इसका गंध से भी निकट सम्बन्ध है।क्या करें
घर में जल का प्रतिनिधि हैंडपंप,जल भंडारण आदि व दर्पण अथवा पारदर्शी कांच करते हैं। घर में बाथरूम अथवा गेस्ट हाउस बनवाने के लिए उत्तर-पश्चिम कोण का चुनाव लाभप्रद है। मकान में जल की निकासी उत्तर-पूर्व में होनी चाहिए।
पृथ्वी
पृथ्वी ऐसा आधार है,जिस पर तीन अन्य तत्व जल, अग्नि व वायु सक्रिय होते हैं। पृथ्वी से मानव को सूंघने की क्षमता मिलती है।क्या करें
वास्तु विज्ञान का मत है कि घर के अंदर मनभावन और शांतिदायक वातावरण आवश्यक है। घर को गुलदस्तों, पौधों और अन्य प्राकृतिक तत्वों की मदद से संवारकर रखना चाहिए। घर में हवादार और हल्का-फुल्का वातावरण बनाने के लिए संतुलित प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। सजावटी वस्तुओं की आकृतियां वर्गाकार हों तो शुभ रहती हैं।