फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Astrology ›   Predictions ›   jupiter transits in capricorn on 20 november jupiter planet impact on kundli in astrology

गुरु ने बदली राशि, जानिए कुंडली के सभी भावों में बृहस्पति का फल

Wed, 18 Nov 2020 11:54 AM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 18 Nov 2020 11:54 AM IST
विज्ञापन
jupiter transits in capricorn on 20 november jupiter planet impact on kundli in astrology
गुरु का मकर राशि में परिवर्तन

सभी ग्रहों में शुभ माने जाने वाले बृहस्पति ग्रह अपनी स्वराशि धनु को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश किया है।  जहां पहले से ही शनि ग्रह मौजूद हैं। वैदिक ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जन्मकुंडली में गुरु दूसरे, पांचवें, नवें और ग्यारहवें भाव का कारक होते हैं। जातकों की जन्मकुंडली में बृहस्पति का अलग-अलग भाव में रहना किस प्रकार का फल देता है, इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।

विज्ञापन

प्रथम भाव

  • किसी भी जातक की जन्मकुंडली में प्रथम भाव में बृहस्पति का रहना कई तरह के अप्रत्याशित परिणाम दिलाता है। कई बार देखा गया है कि ऐसे लोगों में अहंकार की प्रवृत्ति जागृत होती है, जिसके दुष्परिणामस्वरूप वे अपना ही नुकसान कर बैठते हैं। ऐसे जातक प्रखर मस्तिष्क, कुशल प्रबंधन और तर्कशास्त्र में निपुण होते हैं। ये किसी भी तरह के माहौल को अपने अनुरूप ढाल सकते हैं।
  • विज्ञापन

द्वितीय भाव

  • जिनकी जन्मकुंडली में बृहस्पति दूसरे भाव में बैठे हो ऐसे लोग कुशल वक्ता, मधुर भाषा बोलने वाले, धन-संपत्ति से युक्त परिवार का अच्छी तरह से भरण पोषण करने वाले होते हैं। यदि इनके साथ कोई पाप ग्रह हो तो उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में कुछ परेशानियां झेलनी पड़ती है। ऐसे लोग झूठ बोलने से भी परहेज नहीं करते। 
  • विज्ञापन
    विज्ञापन

तृतीय भाव

  • जिनकी जन्मकुंडली में बृहस्पति तीसरे भाव में होते हैं ऐसे लोग भ्रमणशील, पराक्रमी और अपने साहस के बल पर समाज में मान-प्रतिष्ठा पाते हैं। नौकरी में उच्च पद प्राप्त करने वाले ऐसे जातक पढ़ने-लिखने के मामलों में हमेशा तत्पर तो रहते ही हैं साथ में धर्म एवं आध्यात्म के मामलों में भी गहरी रुचि रखते हैं। पारिवारिक सदस्यों तथा भाई बहनों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी बखूबी निर्वहन करते हैं।

चतुर्थ भाव

  • जिसकी जन्मकुंडली के चतुर्थभाव में बृहस्पति विराजमान हों तो उन्हें माता-पिता से स्नेह और मित्रों से पूर्ण सहयोग मिलता है। ऐसा व्यक्ति सामान्य स्तर से कार्य आरंभ करके सफलता के बड़े मापदंड स्थापित करता है। मकान-वाहन का पूर्ण सुख मिलता है और कहीं न कहीं से जमीन जायदाद का भी लाभ मिलता है। केंद्र अथवा राज्य सरकार से जुड़े विभागों में ऐसे लोग अच्छे पद पर आसीन होते हैं।

पंचम भाव

  • जिनकी जन्मकुंडली में बृहस्पति पंचम भाव में विराजमान हों तो ऐसे लोग शिक्षा-प्रतियोगिता के क्षेत्र में अच्छी सफलता हासिल करते हैं। किंतु गुरु के साथ पाप ग्रह भी हो तो पढ़ाई में बाधाएं भी आती हैं। जातक धर्म-कर्म के मामलों में रुचि रखने वाला कुशल वक्ता, तर्कशास्त्री, लेखन प्रबंधन, पूजा-पाठ करने वाला, वेद पाठी तथा ज्योतिष आदि की वृत्ति से भी धन उपार्जन करता है। संतान स्वस्थ और उत्तम होती है।

छठा भाव

  • जिन जातकों की जन्म कुंडलियों में बृहस्पति छठे भाव में होते हैं ऐसे लोग गुप्त शत्रुओं से घिरे रहते हैं। कई बार देखा गया है कि अपने ही लोग षड्यंत्र करने में लगे रहते हैं। स्वास्थ्य के प्रति ऐसे लोगों को हमेशा सावधान रहना चाहिए। व्यापार के क्षेत्र में ऐसे लोग पूर्ण सफल होते हैं। केंद्र अथवा राज्य सरकार के विभागों में अपनी मेहनत के बल पर छोटे स्तर से कार्य आरंभ कर के उच्चपद हासिल करते हैं।

सप्तम भाव

  • जिनकी जन्मकुंडली में बृहस्पति सप्तम भाव में विराजमान हों ऐसे लोगों के जीवन में इनका शुभ प्रभाव किसी वरदान से कम नहीं होता है। ये कैसी भी सफलता चाहें हासिल कर सकते हैं। दांपत्य जीवन सुखद रहता है। सामाजिक जिम्मेदारियां भी अच्छी तरह से निभाते हैं। बृहस्पति के साथ पाप ग्रह भी हों तो कई बार इसमें कठिनाइयां भी आती हैं। उस समय ऐसे लोगों को भावनाओं में बहकर निर्णय लेने से बचना चाहिए।

अष्टम भाव

  • अष्टमभाव में विराजमान बृहस्पति जातक के जीवन में कई तरह के अप्रत्याशित मोड़ लाते हैं जिसकी वे कल्पना भी नहीं किए रहते। ये यदि कमजोर अथवा पाप ग्रहों के साथ हों तो स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। ऐसे लोग ठगी का शिकार होते हैं। कोर्ट कचहरी के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं। बलवान बृहस्पति जातक को मान-सम्मान और अच्छी प्रतिष्ठा दिलाते हैं। अच्छी आयु और उत्तम स्वास्थ्य का सुख मिलता है।

नवम भाव

  • नवम भाव में बृहस्पति विराजमान हों तो समझ लेना चाहिए कि ऐसे लोगों के पूर्व जन्म का भाग्य उदय हुआ है। इसलिए कोई भी कार्य व्यापार आरंभ करना चाहें अथवा विदेश प्रवास के विषय में प्रयास करना चाहें तो भी पूर्णतः सफल रहते हैं। धन संपत्ति से युक्त ऐसे जातक अच्छी संतानों के माता- पिता होते हैं। ये मिलनसार, विद्वान, गुणी  सत्कर्मशील, कीर्तियुक्त तथा सामाजिक कार्यों में रुचि रखने वाले होते हैं।

दशम भाव
  • जिनकी जन्म कुंडली के दशम कर्मभाव में बृहस्पति विराजमान हों ऐसे लोग उत्तम पद पाने वाले मान प्रतिष्ठा से युक्त, लौकिक सुख तथा सभी भोगों के स्वामी होते हैं। समाज में जहां भी रहते हैं इनका वर्चस्व बना रहता है किंतु कई बार ऐसे विवादित निर्णय भी ले लेते हैं जिसके कारण इन्हें मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। जमीन जायदाद और धन धन संपत्ति केऐसे लोग भाग्यशाली होते हैं।
एकादश भाव
  • जिनकी जन्मकुंडली में बृहस्पति एकादश में विराजमान हों ऐसे लोगों के लिए इनका फल अत्यंत शुभकारी होता है। इन्हें सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। जातक स्वअर्जित मकान अथवा वाहन का भी स्वामी होता है। प्रभावशाली व्यक्तित्व, अनेक मित्रों वाला संतानों से सुखी तथा शुभ कर्म करने वाला होता है। यदि बृहस्पति पाप ग्रहों के साथ विद्यमान हो तो बड़े भाइयों से मतभेद रहता है।
द्वादश भाव
  • जिनकी जन्म कुंडली में बृहस्पति बारहवें भाव में विद्यमान हो ऐसे लोग माता-पिता के परम भक्त तथा समाज सेवा के प्रति समर्पित होते हैं। इनका जीवन दूसरों के लिए समर्पित रहता है। धार्मिक ट्रस्ट, मंदिर निर्माण में दान, प्याऊ लगाना, अनाथालय तथा वृद्ध आश्रम आदि बनाने में ऐसे लोग अग्रणी रहते हैं। पाप ग्रहों के साथ होने पर जातक अनैतिक कर्म करने वाला और गलत संगति का शिकार भी हो सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed