Independence Day 2018 : भारत की कुंडली में मारकेश की दशा, जानें कब तक बने रहेंगे ऐसे हालात
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स्वतंत्रता आंदोलन के बाद जब यह सुनिश्चत हो गया कि अब अग्रेज देश को छोड़कर जाएंगे और भारत को आजादी मिलेगी तो उसके लिए दिन तारीख तय की जाने लगी थी। विशेष तौर पर तब जब 14 अगस्त 1947 को जिन्ना की अगुवाई में पाकिस्तान बना। उस वक्त भारत की आजादी के लिए जाने-माने ज्योतिषविद् विश्वविख्यात ज्योतिष सूर्यनारायण व्यास ने शुभ मुहुर्त निकाला था। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के आग्रह पर उज्जैन के पंडित सूर्यनारायण व्यास ने पंचांग देखकर भारत की आजादी के लिए मध्यरात्रि 12:00 बजे यानी स्थिर लग्न नक्षत्र का मुहूर्त सुझाया था, ताकि देश में लोकतंत्र स्थिर रहे।
क्या कहती है कुंडली?
15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ उस समय वृषभ लग्न का क्षितिज पर स्पर्श हो रहा था। उस समय की कुंडली में लग्न मे राहु, द्वितीय कुटुंब भााव में मंगल, तृतीय पराक्रम भाव में सूर्य, चंद्र, बुध, शुक्र, शनि ये पांच ग्रह बैठकर पंचग्रही योग बना रहे हैं। इसके अतिरिक्त छठे ऋण, रोग और शत्रु भाव में गुरु और सातवें पत्नी, व्यवसाय, स्त्री भाव में केतु बैठे हुए हैं। उस समय आश्लेषा नक्षत्र था और बुध की महादशा चल रही थी।
चहुमुंखी विकास का योग
वृषभ लग्न की कुंडली में उस समय अष्टक वर्ग में 44 बिंदु थे। ज्योतिष के अनुसार किसी भी जातक की जन्म कुंडली के लग्न में यदि अष्टक वर्ग में 44 बिंदु हैं तो उस कुंडली की श्रेष्ठता अत्यधिक हो जाती है और कालांतर में उस व्यक्ति का चहुमुंखी विकास होता है। जातक अपनी समस्त इच्छाएं पूर्ण करता है।
पड़ोसी देशों से बनी रहेगी अनबन की आशंका
भारतवर्ष की स्वाधीनता के समय की कुंडली इतनी बलवान है कि उसकी प्रगति में दुनिया की कोई शक्ति बाधक नही बन सकती है। यह जानते हुए कि कुंडली का मारकेश मंगल द्वितीय कुटुंब भाव में है, वहां पर पड़ोसियों से संबंध हमेशा संदिग्ध रहेंगे। पड़ोसियों का चाल, चेहरा और चरित्र हमेशा शंका पैदा करता रहेगा। अत: भारत अपने किसी भी पड़ोसी पर आंखे बंद कर भरोसा नहीं कर सकता है।
भारत के लिए कैसा रहेगा आने वाला समय?
वर्तमान समय में भारतवर्ष की कुंडली पर राहु की महादशा जुलाई 2011 से चल रही है, उसमें भी मार्च 2014 से बृहस्पति की अंतरदशा चल रही थी जो अगस्त 2016 को संपन्न हुई। इसका असर देश की सत्ता परिवर्तन के रूप परिलक्षित होता है। अगस्त 2016 से जून 2019 तक राहु की महादशा में शनिदेव की अंतरदशा चल रही है, जो जून 2019 तक चलेगी और उसमें भी 28 जून 2018 से 27 अगस्त 2018 तक के मध्य भारतवर्ष पर मारकेश मंगल की प्रत्यंतर दशा चल रही है। अत: राहु शनि और मंगल के द्वारा बना हुआ यह योग भारतवर्ष के लिए अनुकूल नहीं है। मारकेश का दुष्परिणाम आर्थिक हानि, प्राकृतिक आपदा, जल प्रलय, भूस्खलन आदि समस्याओं के रूप में सामने आ सकता है।
आपातकाल जैसे बने ग्रह योग!
स्वतंत्र भारत की कुंडली में यही मारकेश मंगल की अंतरदशा 6 जुलाई 1974 से 6 सितंबर 1975 तक थी। जिसके परिणाम स्वरूप भारत को आपातकाल जैसे संकट से गुजरना पड़ा था। अत: वर्तमान में बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद कहीं-कहीं सूखे के संकट का भी सामना करना पड़ेगा। 28 अगस्त 2018 को मारकेश मंगल के बाद राहु की प्रत्यंतर दशा आरंभ होगी जो कि जनवरी तक चलेगी। ऐसे में सितंबर-अक्टूबर में भारत वर्ष में ज्वर और वायरस जनित रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है।