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Astrology: कुंडली में कैसे बनते हैं कॉमेडियन बनने के योग, कपिल शर्मा की कुंडली से समझें
Thu, 01 Jun 2023 11:08 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 01 Jun 2023 11:08 AM IST
सार
मंगल बुध गुरु शनि इन चार ग्रहों की युतियों को भी विद्वानों ने वाकपटु कहा है, ऐसा व्यक्ति बहस में कुशल होता है और अपनी बुद्धि के द्वारा विजय प्राप्त करता है।
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हास्य कलाकार कपिल शर्मा की कुंडली
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ज्योतिष में दूसरे भाव को वाणी का भाव कहा जाता है। इसके अलावा बुध वाणी का प्रमुख कारक ग्रह है। गुरु और काल पुरुष की कुंडली के दूसरे भाव के स्वामी शुक्र को भी वाणी का सौंदर्य उसकी वाकपटुता का कारक माना जाता है। आज इस लेख में हम यह समझेंगे कि कोई व्यक्ति कैसे इतना वाकपटु बनता है चाहे वह वक्ता हो चाहे वह नेता हो अभिनेता हो कवि हो इन सभी क्षेत्रों में हम यह समझते हैं कि व्यक्ति का वाकपटु होना बहुत आवश्यक है।
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- वैदिक ज्योतिष के अनुसार अगर सूर्य बुध शुक्र शनि की युति हो तो जातक बहुत अच्छा बोलने वाला होता है। इसी प्रकार अगर सूर्य गुरु शुक्र शनि युति हो तो जातक कवि होता है। उसकी वाणी अच्छी होती हैं और कलाकारों में वह अग्रणी होता है। एक अन्य योग की अगर बात करें तो मंगल बुध गुरु शनि इन चार ग्रहों की युतियों को भी विद्वानों ने वाकपटु कहा है, ऐसा व्यक्ति बहस में कुशल होता है और अपनी बुद्धि के द्वारा विजय प्राप्त करता है।
- इसके अलावा नवम भाव में बुध हो तो भी इस प्रकार का योग बनता है। वैदिक ज्योतिष के नियमों के अनुसार अगर जातक की कुंडली में चंद्रमा और बुध की युति है या फिर बुध और शुक्र की युति है तो जातक बोलने में कुशल होता है। सभी विद्वानों ने बुद्ध को प्रधानता दी है और गुरु और शुक्र की भूमिका भी सहायक मानी जाती है।
- इसके अलावा अगर बुध लग्न में हो गुरु सप्तम स्थान में हो तो जातक हास्य प्रधान होता है। शुक्र शुभ ग्रह की राशि हो उसमें मंगल और बुध की युति हो तो भी जातक अच्छा बोलने वाला होता है।
- चंद्रमा मंगल बुध अगर बलवान ग्रहों से दृष्ट हो तो भी व्यक्ति हाजिर जवाब होता है। इन सब चीजों को समझने के लिए हम कॉमेडियन कपिल शर्मा की कुंडली का उदाहरण लेते हैं।
- अगर हम इस कुंडली को देखें तो कुंभ लग्न की कुंडली में बुध और चंद्रमा दोनों ही लग्न में विराजमान है, वाणी भाव में उच्च का शुक्र है जहां मंगल भी शुक्र की युति से बहुत बलवान हो गया है। इस कुंडली को गौर से देखने पर यह समझ में आता है कि दूसरे भाव में बलवान शुक्र के विराजमान होने से दूसरा भाव अति बलवान हो गया है इसके अलावा दूसरे भाव के स्वामी बृहस्पति की अष्टम भाव में विराजमान होकर अपने ही भाव पर दृष्टि है।
- लग्नेश शनि ग्यारहवें भाव के स्वामी और दूसरे भाव के स्वामी के साथ अष्टम भाव में विराजमान होकर इस बात का प्रबल संकेत दे रहे हैं कि जातक अपनी वाणी से प्रसिद्ध होगा।
- इस कुंडली में आठवें भाव का स्वामी भी लग्न में विराजमान है और यह बहुत ही शानदार राशि परिवर्तन राजयोग है। लग्न का स्वामी अष्टम भाव में विराजमान है और अष्टम का स्वामी लग्न में विराजमान है और वह छठे भाव के स्वामी चंद्रमा के साथ है।
- छठे भाव के स्वामी से संघर्ष का विचार किया जाता है इसलिए इस कुंडली में यह योग भी फलीभूत हो रहा है कि जातक अपने संघर्ष के द्वारा उच्च पद को प्राप्त करेगा। अगर कपिल शर्मा का जीवन देखे तो उन्होंने एक छोटे से कॉमेडियन से अपने जीवन की शुरुआत की लेकिन आज वह कॉमेडी के शिखर पर विराजमान है।
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