{"_id":"5dedec1a8ebc3e1bf22c2633","slug":"importance-of-kharmas-in-astrology","type":"story","status":"publish","title_hn":"जानिए क्या है 'खरमास' जिसके लगते ही शुभ एवं मांगलिक कार्यों पर लग जाता है विराम","category":{"title":"Astrology","title_hn":"ज्योतिष","slug":"astrology"}}
जानिए क्या है 'खरमास' जिसके लगते ही शुभ एवं मांगलिक कार्यों पर लग जाता है विराम
Mon, 09 Dec 2019 02:42 PM IST
विनोद शुक्ला
पं जयगोविंद शास्त्री
पं जयगोविंद शास्त्री
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 09 Dec 2019 02:42 PM IST
विज्ञापन
खरमास में खर का अर्थ 'दुष्ट' और मास का अर्थ महीना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भगवान सूर्य के 16 दिसंबर को दोपहर 03 बजकर 27 मिनट पर वृश्चिक राशि की यात्रा समाप्त करके धनु राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास आरम्भ हो जाएगा। सूर्यदेव जब भी देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु या मीन पर भ्रमण करते हैं तो उसे प्राणी मात्र के लिए अच्छा नहीं माना जाता और शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं।
खरमास का मतलब
खरमास पर शुभ कार्य निषेध
खरमास पर क्या करें
विज्ञापन
खरमास का मतलब
- खरमास में खर का अर्थ 'दुष्ट' होता है और मास का अर्थ महीना होता है, इसे आप 'दुष्टमास' भी कह सकते हैं। इस मास में सूर्य बिलकुल ही क्षीण होकर तेज हीन हो जाते हैं। मार्गशीर्ष और पौष का संधिकाल खरमास को जन्म देता है, मार्गशीर्ष माह का दूसरा नाम 'अर्कग्रहण भी है' जो कालान्तर में अपभ्रंश होकर अर्गहण हो गया। अर्कग्रहण एवं पौष के मध्य ही यह खरमास पड़ता है। इन माहों में सूर्य की किरणें कमज़ोर हो जाती हैं इनके धनु राशि में प्रवेश के साथ ही राशि स्वामी गुरु का तेज भी प्रभावहीन रहता है और उनके स्वभाव में उग्रता आ जाती है।
विज्ञापन
खरमास पर शुभ कार्य निषेध
- गुरु के स्वभाव को भी उग्र कर देने वाले इस माह को खरमास-दुष्टमास नाम से व्यवहृत किया गया। देवगुरु बृहस्पति के उग्र अस्थिर स्वभाव एवं सूर्य की धनु राशि की यात्रा और पौष मास के संयोग से बनने वाले इस मास के मध्य शादी-विवाह, गृह आरंभ, गृहप्रवेश, मुंडन, नामकरण आदि मांगलिक कार्य शास्त्रानुसार निषेध कहे गए हैं।इन दिनों सूर्य के रथ के साथ अंशु तथा भग नाम के दो आदित्य, कश्यप और क्रतु नाम के दो ऋषि, महापद्म और कर्कोटक नाम के दो नाग, चित्रांगद तथा अरणायु नामक दो गन्धर्व सहा तथा सहस्या नाम की दो अप्सराएं, तार्क्ष्य एवं अरिष्टनेमि नामक दो यक्ष आप तथा वात नामक दो राक्षस चलते हैं।
विज्ञापन
खरमास पर क्या करें
- राज्यपद की लालसा रखने वाले, बेरोजगार नवयुवकों अथवा अधिकारियों से प्रताडित लोगों को प्रातः लालसूर्य की आराधना करनी चाहिए। जिन्हें बार-बारचोट लगती हो, दुर्घटना के शिकार अधिक होते हों, अपनी हत्या का भय हो, हृदयघात-हार्टअटैक होता हो या संभावना हो तथा जो अकाल मृत्यु के भय से डरे हों यदि वे दोपहर 'अभिजीत' मुहूर्त में सूर्य की आराधना करें तो उन्हें जीवन पर्यंत इसका भय नहीं रहेगा, न ही इस तरह की बीमारियों से उनकी मृत्यु होगी।घर में अन्न-धन-जन परिपूर्ण रहे इसके लिए शायंकालीन अस्ताचल के समय सूर्य की आराधना करने से प्राणी को भौतिक वस्तुओं का अभाव नहीं रहता। जिन्हें सभी भौतिक सुख तथा पृथ्वी के ऐश्वर्य की इच्छा हो उन्हें प्रातःकालीन ब्रह्मवेला में सूर्य की आराधना करनी चाहिए।
- ज्योतिषशास्त्र में भी कहा गया है कि "सप्तदोषं रविर्हन्ति, शेषादि उत्तरायणे'' अर्थात सूर्य सात ग्रहों का दोष अकेले ही शमन कर देते हैं और उत्तरायण हों तो सभी ग्रहों का दोष शमन कर देते हैं। इसलिए दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों दोषों से मुक्ति पाते हुए सभी प्रकार के भौतिक सुख की कामना के लिए इनकी आराधना मंगलकारी रहेगी।