रक्षाबंधन का पर्व पारंपरिक रूप से बहनों व भाइयों के आपसी स्नेह के प्रतीक रूप में मनाया जाता है, लेकिन यह दिन केवल बहन द्वारा भाई को राखी बांधने तक ही सीमित नहीं है। इसके मायने और भी हैं। रक्षाबंधन पर्व को मनाने का उद्देश्य भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की मर्यादा को बनाए रखने के साथ-साथ अपनी प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।
भविष्य पुराण के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन प्रातः नित्य क्रिया से निवृत्त होने के बाद श्रुति-स्मृति विधि से स्नान करके देवताओं और पितरों का निर्मल जल से तर्पण करना चाहिए तथा वेदपाठी ब्राह्मणों के रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें दान आदि देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। इस धागे को बांध्ाने से नकारात्मकता दूर होती है।
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