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कुण्डली बताती है, धरती पर जन्म लेने से पहले आप कहां थे

टीम डिजिटल

यह प्रकृति का नियम है कि जिनका जन्म होता है उन्हें एक दिन मरना भी होगा। अगर मुक्ति नहीं मिली तो वापस पृथ्वी पर आकर अपने कर्मों का फल फिर से भोगना पड़ेगा। इस तरह जीवन और मृत्यु का सिलसिला चलता रहता है।

लेकिन जीवन और मृत्यु के बीच में प्राण कहां रहता है यह जानने की चाहत हर व्यक्ति की होती है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इसे जानना भी बहुत आसान है। जब व्यक्ति का जन्म होता है तब पूर्व जन्म से लेकर मृत्यु के बाद तक की सभी स्थितियों को भगवान ग्रहों एवं राशि के माध्यम से जन्मकुण्डली में निर्धारित कर देते हैं।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जन्म कुण्डली में सूर्य और चन्द्रमा में से जो बलवान हो उसकी स्थिति देखनी चाहिए। इन दोनों में से जो बलवान हो यानी अपनी राशि या मित्र राशि में और चन्द्रमा या शुक्र के द्रेष्काण में हो तो व्यक्ति की आत्मा पितृलोक से धरती पर आई है।

ऐसा मानना चाहिए। अगर द्रेष्काण का स्वामी उच्च राशि में होता है तो इसका मतलब है व्यक्ति दिव्य पितृलोक में सुख प्राप्त करके आया है। लेकिन नीच राशि में है तो यह संकेत है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति की आत्मा को कष्ट में जीने वाले पितरों के लोक में कष्ट भोगना पड़ा है।
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