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इस मुहूर्त में करें शिक्षा की शुरूआत, खूब पढ़ेंगे बच्चे

राकेश/इंटरनेट डेस्क।

हर माता-पिता की चाहत होती है कि उनके बच्चे खूब पढ़े लिखें और योग्य बनें। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुण्डली में अगर विद्या योग नहीं हों तो पढ़ने-लिखने में रूचि कम होती है। व्यक्ति के ज्ञान का स्तर कम होता है। इस तरह की स्थिति में दोष निवारण करने के लिए अच्छे मुहूर्त में बच्चे की शिक्षा आरंभ करवानी चाहिए।

मुहूर्त शास्त्र के अनुसार जो काम शुभ मुहूर्त में शुरू होता है उसका परिणाम भी शुभ होता है। इस दृष्टि से बच्चों की शिक्षा आरंभ करने के लिए सबसे उत्तम तिथि माघ शुक्ल पंचमी तिथि को माना गया है। वेद और पुराणों में कहा गया है कि सृष्टि के आरंभ में माघ शुक्ल पंचमी तिथि को ज्ञान की देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं। इन्होंने अपनी वीणा से स्वर को जन्म दिया था। इसलिए इस दिन माता सरस्वती की पूजा की जाती है और ज्ञान एवं विद्या प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है।

विद्या आरंभ के लिए प्राचीन काल में माता-पिता अपने बच्चों को बसंत पंचमी यानी माघ शुक्ल पंचमी को गुरू के पास ले जाते थे। गुरू बच्चों से सबसे पहले ' ॐ ' शब्द लिखवाते थे। माना जाता था कि जो बच्चा इस अक्षर को जितना सुन्दर लिखता है उस पर मां सरस्वती की उतनी कृपा दृष्टि है। ॐ शब्द लिखवाने का कारण यह माना जाता है कि ब्रह्माण्ड में सबसे पहले ॐ शब्द गूंजा था। इसी शब्द से सृष्टि का अरंभ हुआ। इस एक अक्षर में त्रिदेवों की शक्ति समाहित है। यह परमाक्षर, ब्रह्माक्षर है। इस एक अक्षर में पांच अक्षर अ + अ + आ + उ + म अक्षर सामहित हैं। इसलिए सरस्वती पूजा के दिन बच्चों का शिक्षा आरंभ संस्कार करना चाहिए और उनसे ॐ शब्द लिखवाना चाहिए।

पंचांग के अनुसार इस वर्ष माघ शुक्ल पंचमी 14 फरवरी और 15 फरवरी को है। इन दोनों तिथियों में कई उत्तम योग भी बने हुए हैं। इसलिए इन दोनों तिथियों में बच्चों का विद्या आरंभ संस्कार किया जा सकता है। 15 तारीख को दोपहर से पहले तक का समय इस कार्य के लिए अच्छा है।
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