अब 5 दिसंबर को 9:13 पर उदित होने जा रहे हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार पाप ग्रह जब अस्त होते हैं तब अपनी क्रूरता को अधिक नहीं दिखा पाते हैं। इनका प्रभाव भी कम हो जाता है।
ऐसे में शनि व्यक्ति विशेष की कुंडली में जिन भावों के स्वामी होते हैं उन भावों से संबंधित फलों में अस्त होने पर कमी कर देते हैं। चाहे वह शुभ फल हों या अशुभ फल।
शनि के उदित होने के बाद इनका प्रभाव बढ़ जाएगा और शनि से मिलने वाले शुभ और अशुभ फलों में तेजी आ जाएगी। शनि का गोचर इस समय वृश्चिक राशि में हो रहा है और सूर्य के साथ बुध भी इसी राशि में रहेगें।
बुध 13 दिसंबर तक शनि के साथ तो सूर्य 16 दिसंबर तक शनि के साथ रहेगें। इन तीन ग्रहों के योग ज्यादा शुभ नहीं कहा जा सकता है।
शनि के उदय होने पर रोग वृद्घि होगी। देश के विभिन्न भागों में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जातीय व सांप्रदायिक तनाव भी बढ़ सकता है। साथ ही दैनिक उपयोगी वस्तुओं की कीमतों में वृद्घि होगी।
शनि के उदय होने से विभिन्न राशि के व्यक्तियों पर भी प्रभाव पडे़गे जो जन्म कुंडली में शनि की स्थिति और दशाक्रम पर भी निर्भर करेगा।
यदि शनि जन्म कुंडली में शुभ योग बना रहे हैं और दशा भी शुभ है तब अशुभ फलों की प्राप्ति कम होगी। अगर व्यक्ति विशेष की जन्म कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में है और दशाक्रम भी अनुकूल नहीं है तब शनि कष्टकारी सिद्ध हो सकते हैं। वैसे शनि उदित होने का राशिया पर प्रभाव इस प्रकार रहेगा।
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