जनपद में उद्यान विभाग की योजना के तहत कागजी नींबू के नाम पर दिए गए पौधों में जंभीरी फल लगने का मामला सामने आया है। इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। चार साल की मेहनत के बाद भी सही उत्पादन न मिलने पर किसान अब न्याय और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। ऊखीमठ क्षेत्र के ग्राम सेनागढ़सारी निवासी किसान मानवेन्द्र नेगी ने बताया कि उन्होंने अगस्त 2020 में अपनी 25 नाली भूमि पर 125 पौधे लगाए थे। इनमें से 113 पौधे वर्तमान में जीवित हैं। पौधों में फल आने पर पता चला कि यह कागजी नींबू नहीं बल्कि जंभीरी नींबू हैं। उन्होंने बताया कि उसी समय उद्यान विभाग ने करीब 60 किसानों को कागजी नींबू के पौधे दिए थे। किसानों ने लगातार चार साल तक इन पौधों की देखभाल की। अब अधिकतर खेतों में जंभीरी फल लगने की बात सामने आई है। सोशल मीडिया में मामला सामने आने के बाद कृषि मंत्री के निर्देश पर जिलाधिकारी स्तर से जांच कराई गई। जांच में भी गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। इसके बावजूद किसानों को अभी तक कोई मुआवजा नहीं मिला है। किसानों का कहना है कि उन्होंने इन पौधों पर लगातार मेहनत की। इस दौरान वे दूसरी फसल भी नहीं ले सके। इससे उन्हें आर्थिक और मानसिक नुकसान हुआ है। किसानों ने उद्यान निदेशालय रानीखेत और जिला उद्यान अधिकारी से कई बार मुआवजे की मांग की है। अभी तक न तो कोई राहत मिली है और न ही प्रतिकर तय करने के लिए समिति बनाई गई है। इधर, कृषि एवं उद्यान सलाहकार डॉ. राजेंद्र कुकसाल ने बताया कि यदि विभाग स्तर पर समाधान नहीं होता है तो किसान उत्तराखंड पौधशाला अधिनियम 2019 की धारा 19(2) के तहत जिला न्यायालय में वाद दायर कर सकते हैं।