ऑनलाइन गेमिंग और इंटरनेट ने जहां बच्चों की शारीरिक गतिविधियों को सीमित कर दिया है, वहीं जनपद के अगस्त्यमुनि में बच्चों का पतंगों के प्रति बढ़ता क्रेज उन्हें घर की चारदीवारी से बाहर निकालने का माध्यम बना है। इससे न सिर्फ बच्चों के हाथों से मोबाइल छूटा है बल्कि बच्चे हवाओं का रुख समझते हुए नीला आसमान झांक रहे हैं। बसंत के आगमन से पहले पतंगें अगस्त्यमुनि बाजार में हाथों-हाथ बिक रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण बच्चों का इन रंग-बिरंगी पतंगों के प्रति आकर्षण है। बच्चे विभिन्न कार्टून कैरेक्टर वाली पतंगें खरीद रहे हैं, जिनकी कीमत 10 रुपये से 50 रुपये तक है। वहीं तिरंगे के रंग से सजी पतंगें भी खूब बिक रही हैं। अगस्त्यमुनि में पतंगों की बढ़ती बिक्री पर व्यापारी हिमांशु सिंह का कहना है कि बसंत पंचमी से पहले ही बाजार में पतंगों की बिक्री शुरू हो गई थी, जो बच्चों द्वारा अब तक जारी है। कहा ल, उखीमठ, गुप्तकाशी और रुद्रप्रयाग में अच्छा बाजार होने के बावजूद वहां पतंगों के प्रति इतना आकर्षण नहीं मिल रहा है। वहीं पतंगें लेने वाले बच्चों के परिजनों का कहना है कि बच्चे खुद पतंगों की मांग कर रहे हैं। यह अच्छा है कि बच्चे मोबाइल से बाहर निकलकर कुछ नया सीख रहे हैं। बच्चों को पतंग उड़ाना सिखाने में भी मजा आ रहा है, इसी बहाने उनके साथ समय भी बीत रहा है और हमें भी अपना बचपन याद आ रहा है।