भगवान केदारनाथ के कपाट अक्तूबर माह में शीतकाल के लिए विधिवत रूप से बंद हो चुके हैं। कपाट बंद होने के साथ जहाँ केदारघाटी में सन्नाटा पसर गया है, वहीं बदरीनाथ धाम में अभी भी यात्रा जारी है। बदरीनाथ दर्शन के उपरांत अनेक श्रद्धालु गुप्तकाशी पहुँच रहे हैं। यहाँ स्थित विश्वनाथ मंदिर, जिसे छोटा केदार कहा जाता है, में दर्शन-पूजन कर श्रद्धालु अपनी यात्रा को पूर्ण मान रहे हैं। बुधवार को दिल्ली से आए छह सदस्यीय दल ने भी बदरीनाथ यात्रा के बाद गुप्तकाशी पहुँचकर विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। दल के सदस्यों विनोद कुमार, प्रमोद व विष्णु ने बताया कि केदारनाथ के कपाट बंद हो चुके हैं। हमें जानकारी मिली थी कि गुप्तकाशी का धार्मिक महत्व केदारनाथ के समान है, इसलिए हम यहाँ दर्शन के लिए आए हैं। विश्वनाथ मंदिर के प्रबंधक भगवती प्रसाद सेमवाल ने बताया सदियों से केदारनाथ जाने वाले यात्री पहले गुप्तकाशी के विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करते आए हैं। आज भी जो श्रद्धालु ऊँचाई वाले क्षेत्रों तक नहीं जा पाते, वे यहाँ पूजा-अर्चना कर केदारनाथ दर्शन का पुण्य प्राप्त करते हैं। ऐतिहासिक रूप से भी गुप्तकाशी मंदिर का महत्व अत्यधिक है। कहा जाता है कि चौदहवीं से सत्रहवीं शताब्दी तक जब केदारनाथ मंदिर पूर्णतः बर्फ़ से ढका रहा, उस कालखंड में केदारनाथ की समस्त पूजा-अर्चना गुप्तकाशी के विश्वनाथ मंदिर में ही सम्पन्न होती रही।