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श्रीनगर में मुआवजा भुगतान की मांग , यूकेडी कार्यकर्ता करेंगे 6 को जीवीके परियोजना कार्यालय का घेराव

पूरण सिंह कठैत ने प्रेसवार्ता कर सरकार और कंपनी पर लगाए शोषण के आरोप, आंदोलनकारियों की रिहाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी श्रीनगर। अलकनंदा हाइड्रो पावर परियोजना (जीवीके) से प्रभावित ग्रामीणों के लंबित मुआवजे के भुगतान की मांग को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने आंदोलन को समर्थन दिया है। यूकेडी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पूरण सिंह कठैत ने प्रेसवार्ता कर कहा कि प्रभावित ग्रामीणों का मुआवजा अभी तक पूरी तरह से सेटलमेंट नहीं हुआ है। इसके विरोध में यूकेडी कार्यकर्ता जीवीके परियोजना कार्यालय का घेराव करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रभावितों का शोषण बंद नहीं हुआ और उनका बकाया मुआवजा जल्द नहीं दिया गया तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। पूरण सिंह कठैत ने कहा कि परियोजना के लिए ग्रामीणों ने अपनी जमीनें दीं, जिससे देश की बिजली जरूरतों की पूर्ति हो रही है, लेकिन प्रभावित परिवार आज भी अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुआवजे का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन करने वालों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यूकेडी प्रभावित ग्रामीणों के साथ खड़ी है और जरूरत पड़ने पर रात 12 बजे भी उनके समर्थन में पहुंचेगी। इस दौरान प्रभावित महिला गीता देवी ने आरोप लगाया कि मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीण पिछले लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। वर्ष 2018 में भी आंदोलन के दौरान 46 महिलाओं और 18 पुरुषों को जेल जाना पड़ा था। उन्होंने बताया कि हालिया आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने करीब एक माह तक जीवीके कंपनी के कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना दिया। इसके बाद कीर्तिनगर एसडीएम कार्यालय में हुई वार्ता में कंपनी के एचआर ने 15 दिन के भीतर भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी कार्यालय पहुंचने पर सुरक्षाकर्मियों ने आंदोलनकारियों के साथ मारपीट की, जिसमें महिला मोर्चा की अध्यक्ष का हाथ टूट गया और उनके कपड़े भी फाड़े गए। वहीं, पुलिस की कार्रवाई के दौरान आंदोलनकारी महिलाओं को जबरन उठाकर ले जाया गया। उन्होंने कहा कि भारत संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच के संयोजक दौलत कुंवर और आंदोलनकारी सरस्वती देवी को भी गिरफ्तार कर पौड़ी ले जाया गया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे दबाव में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए और उसकी प्रति भी उपलब्ध नहीं कराई। उन्होंने मांग की है कि दौलत कुंवर और सरस्वती देवी को सम्मानपूर्वक रिहा किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलनकारियों की रिहाई के बाद भी मुआवजा भुगतान होने तक धरना जारी रहेगा। इस दौरान महिलाओं ने शासन-प्रशासन के रवैये पर भी नाराजगी जताई।

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