नैनीझील की पारिस्थितिकी को बनाये रखने के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय के मत्स्य विभाग की ओर से नैनीझील में महाशीर और सिल्वर कार्प मछली के बीज डाले गए। जो जलीय पारिस्थितिकी में सुधार लाने का काम करेंगी। साथ ही पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेंगी। शुक्रवार को पंतनगर विश्वविद्यालय मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों व कर्मचारियों की टीम नैनीताल पहुंची। टीम ने प्राधिकरण कर्मियों के साथ मिलकर तल्लीताल फांसी गधेरा क्षेत्र से झील में 20 हजार सिल्वर कार्प व पांच हजार गोल्डन महाशीर मछली छोड़ी। इस दौरान डॉ. आशुतोष मिश्रा ने बताया कि झील की जलीय पारिस्थिकी का स्तर बेहद गिर गया था। जिस कारण झील में मछलियां भी मरने लगी थी। एरिएशन के बाद झील की पारिस्थितिकी में सुधार लाने के लिए विभिन्न प्रजातियों की मछलियां डाली गई थी। लेकिन कुछ ही वर्षों में झील में कॉमन कार्प मछली की संख्या बेहद बढ़ने लगी। जिसे नियंत्रित करने के लिए कॉमन कार्प, बिग हेड प्रजाति की मछलियाें को निकालने के साथ ही नई प्रजातियों को झील में छोड़ा जा रहा है। बताया कि झील मे 20 000 महाशीर और सिल्वर कॉर्प मछलीयों के बीज झील में डाला है। बताया सिल्वर कार्प झील की काई व खरपतवार को कम करेंगी, जबकि गोल्डन महाशीर जीवित जीवों को खाकर झील को साफ बनाये रखने में मदद करेगी।