संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना के लिए माताओं ने शनिवार को जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) का निराजल व्रत रखा। प्रदोष काल यानी शाम 06:05 बजे से मंदिरों, कुंडों व घाटों पर सविधि पूजन किया गया। इस दौरान महिलाओं ने जीउतवाहन की कथा का श्रवण किया। महिलाएं चार अक्तूबर को सुबह 07:28 बजे से पारण करेंगी। लक्ष्मीकुंड पर जिउतिया पूजन के लिए मेला लगा।