श्रावस्ती/गिरंट बाजार। बंगाल की खाड़ी से उठे अर्नब तूफान का सबसे ज्यादा दंश तराई के किसानों को झेलना पड़ रहा है। मूसलाधार बारिश के साथ चली तेज हवा ने खेतों में लगी धान, मक्के की फसल को ताश के पत्तों की तरह बिछा दिया है। सबसे ज्यादा नुकसान धान व मक्का किसानों को हुआ है। खेत में फसल गिरने के साथ ही पानी भरा होने से किसानों को फसल सड़ने व जमाव होने का खतरा सता रहा है। तराई में लगातार चार दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश से किसानों के हजारों बीघा धान व मक्के की फसल की फसल जमींदोज हो गई है। जमुनहा, भिनगा व इकौना तहसील क्षेत्र के हजारों किसान इसकी चपेट में आए हैं। रविवार की सुबह बारिश का सिलसिला थमने के बाद किसानों को फसल नुकसान का आकलन करते देखा गया। तराई में बारिश से ज्यादा तेज हवाओं ने कहर बरपाया है और फसलें खेतों में बिछ गई है। सबसे ज्यादा नुकसान धान के किसानों को हुआ है। धान गिरने के साथ ही उस पर कई फीट पानी भरा है, इससे धान के सड़ने की आशंका है। वहीं, मक्का किसानों को मक्के की बालियों में अंकुरण होने का खतरा सता रहा है। मक्का किसानों का छलका दर्द जमुनहा तहसील के खांसाहबपुरवा निवासी किसान मुजीबुर्ररहमान ने बताया कि लगातार बारिश से 20 बीघा मक्का गिर गया है। पानी भरा होने से बालियों में अंकुरण की संभावना है। पानी निकालने का प्रयास कर रहे हैं। शासन-प्रशासन से मदद की उम्मीद है। नगईगांव निवासी बरसाती व अब्दुल सलाम ने बताया कि उनका पांच-पांच बीघा मक्का गिरा है। बच्चों का भविष्य व पालन-पोषण इसी फसल पर टिका था, जो अब जमींदोज हो गई है। बलिदानपुरवा दक्षिणी निवासी निवासी दिनेश यादव ने बताया कि मक्के को भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन को मुआवजा देना चाहिए। धान की फसलें खेत में बिछी मूसलाधार बारिश ने धान के किसानों को भी गहरा दर्द दिया है। भिठिया चिचड़ी निवासी किसान कमलेश कुमार ने बताया कि उनका दो बीघा धान की फसल जमींदोज हो गई है। पानी भरा होने से धान की बालियों में सड़न व अंकुरण की संभावना है। किसान राजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि उनका लगभग चार बीघा धान गिर गया है। वहीं, गांव निवासी लवकुश ने बताया कि उनकी दोनों धान व मक्के की फसल को नुकसान हुआ है। धान की फसल में फूल निकल रहे थे, तेज हवा में फूल गिरने से उपज घट जाएगी।