बरसाना।जिस ब्रज की धूल को रमेश बाबा ने जीवनभर माथे से लगाया, उसी ब्रज की परिक्रमा करते हुए उनकी अंतिम यात्रा पूरी हुई। रस मंडप गहवर वन से अंतिम दर्शन के बाद बाबा का सजा हुआ डोला निकला तो राधे-राधे के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। ब्रह्मचल पर्वत की परिक्रमा के दौरान मार्ग में खड़े ब्रजवासियों और अनुयायियों ने बाबा के डोले पर पुष्प अर्पित किए। संत को अंतिम विदाई देते समय कई ब्रजवासियों की आंखें छलक पड़ीं। परिक्रमा पूरी होने के बाद डोला माताजी गौशाला पहुंचा, जहां पवित्र गोष्ठ में अंतिम संस्कार की विधियां शुरू हुईं।